निर्देशक प्रिंस धीमान और निर्माता कानू चौहान द्वारा बनाई गई फिल्म केसरी वीर को आज सिनेमाघरों में रिलीज कर दिया गया है। इस फिल्म के मुख्य कलाकारों में सुनील शेट्टी सूरज पंचोली, विवेक ओबरॉय के साथ-साथ आकांक्षा शर्मा दिखाई देती हैं।
एक अच्छी फिल्म में क्या होना चाहिए? कहानी, पटकथा, निर्देशन, वीएफएक्स, डायलॉग, एक्टिंग, कलर ग्रेडिंग, सिनेमैटोग्राफी, प्रेजेंटेशन, म्यूजिक। जब किसी फिल्म में यह सभी चीजें पूर्ण रूप से दिखाई पड़ती हैं, तब उस फिल्म की सफलता 100% निश्चित हो जाती है।
पर अगर इनमें से किसी एक चीज पर भी फिल्म में काम न किया गया हो, तो उस फिल्म की अच्छी चीजों पर भी उसका असर देखने को मिलता है। केसरी वीर एक पीरियड ड्रामा फिल्म है। आइए जानते हैं कि यह आपके समय को कितना डिजर्व करती है।

केसरी वीर रिव्यू
केसरी वीर की कहानी वीर हमीर जी गोहिलbकी है। इन्होंने सोमनाथ मंदिर को बचाने के लिए तुगलक एम्पायर से मोर्चा लिया था और इस दौरान इस लड़ाई में इन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। इतिहास के इस योद्धा की कहानी को बड़े पर्दे पर लाने का काम प्रिंस धीमान ने किया है।
सोमनाथ मंदिर पर जिस तरह से आक्रमण हुआ था, इसके बारे में हमारी किताबों में बहुत कम लिखा हुआ है, जिस कारण आज के युवाओं को इस इतिहास के बारे में उतना नहीं मालूम जितना होना चाहिए। फिल्म का पहला हिस्सा थोड़ा धीमा है, जहां किरदारों को प्रस्तुत करने में काफी समय लिया जाता है, जिसे देखकर ऐसा लगता है कि स्क्रीनप्ले कहीं न कहीं थोड़ा कमजोर है।
पर अगर सेकंड हाफ की बात की जाए, तो ट्विस्ट और टर्न, गूंसबंप मोमेंट्स, एक अच्छी डायलॉगबाजी फिल्म में जान डालती है। इंटरवल के बाद यह फिल्म खुद को दर्शकों से पूरी तरह जोड़ लेती है। एक बात तो सच है कि पीरियड ड्रामा फिल्मों को बनाना उतना आसान नहीं।
इस तरह की फिल्में आम फिल्मों के मुकाबले मुश्किल भी होती हैं और महंगी भी। फिल्म को देखकर एक बात तो साफ जाहिर होती है कि यहां आर्ट डायरेक्शन के साथ-साथ कॉस्ट्यूम डिजाइनर ने भी बहुत मेहनत की है। केसरी वीर के डायलॉग की सबसे अच्छी बात यह है कि यह हिंदी-उर्दू मिश्रण में बहुत अच्छे से पेश किए गए हैं।

सूरज पंचोली का आत्मविश्वास उनकी एक्टिंग में देखने को मिलता है, जिस वजह से उनकी एक्टिंग रियल लगती है। उनकी डायलॉग डिलीवरी में जोश के साथ-साथ एक ठहराव भी नजर आता है।
सुनील शेट्टी का किरदार वेगता जी का है और इन्होंने अपने किरदार को बखूबी निभाया है। जिस तरह से यह फिल्म में अपनी डायलॉगबाजी से परफॉर्म करते नजर आ रहे हैं, उसे देखकर कहीं न कहीं बॉर्डर की याद तो जरूर आती है।
विवेक ओबरॉय ने यहां जफर खान का किरदार निभाया है, पर यह किरदार जिस तरह का क्रूर शासक था, उस तरह से विवेक ओबरॉय इसे क्रूर नहीं बना सके। आकांक्षा शर्मा ने भी फिल्म में ठीक-ठाक काम किया है। बैकग्राउंड म्यूजिक की बात की जाए, तो वह अच्छा है।
केसरी वीर के पॉजिटिव और नेगेटिव पॉइंट
केसरी वीर का प्रोडक्शन बहुत कमजोर नजर आता है। 25 करोड़ में बनाई गई इस फिल्म को देखकर ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता कि इसमें 25 करोड़ का निवेश किया गया हो। पूरी फिल्म में सिर्फ क्लाइमेक्स ही अच्छा है, इसे देखकर लगता है कि पैसे वसूल हुए।
गुजरात की संस्कृति को बहुत अच्छे से कहानी में पेश किया गया है। इस तरह से गुजराती फोक म्यूजिक को यहां इस्तेमाल किया गया है, वह सुनने में काफी अच्छा लगता है। एक्शन सीन थोड़े और बेहतर किए जा सकते थे। बहुत ज्यादा स्लो मोशन का इस्तेमाल किया गया है। वीएफएक्स बहुत कमजोर है। एक अच्छे विषय पर एक अच्छी फिल्म बनाई जा सकती थी, जो शायद बनते-बनते रह गई।
निष्कर्ष
2 घंटे 41 मिनट की इस फिल्म में बहुत कुछ दिखाने लायक था, पर कुछ भी सही से नहीं दिखाया गया। केसरी वीर की कहानी तो बहुत अच्छी थी, पर इसके प्रेजेंटेशन ने बंटाधार कर दिया। अगर आपके पास देखने लायक कुछ भी नहीं है और आप हिस्टोरिकल फिल्में देखने का शौक रखते हैं,
तब आप इसे सिनेमाघर में जाकर देख सकते हैं। फिल्म की एक और अच्छी बात यह है कि इसे अपनी पूरी फैमिली के साथ बैठकर देखा जा सकता है। मेरी तरफ से इस फिल्म को दी जाती है 5 में से 2.5 स्टार की रेटिंग।
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