ZORA: त्रिदेव गुप्त मोहरा जैसी फिल्मे बनाने आए राजीव रॉय की फिल्म ज़ोरा में आखिर क्या है ख़ास

Written by: Amir khan
Publish On: October 2, 2025 5:31 PM (IST)
ZORA MOVIE REVIEW HINDI

त्रिदेव,गुप्त, मोहरा जैसी फिल्मों को बनाने वाले राजीव रॉय की फिल्म जोरा सिनेमा घरों में रिलीज कर दी गई है। इसे एक सस्पेंस थ्रिलर फिल्म बोला जा सकता है। राजीव रॉय काफी समय से अमेरिका में रह रहे थे, अब उन्होंने बॉलीवुड में वापसी करने की सोची और बना डाली जोरा नाम की यह फिल्म।

कुछ रिपोर्ट के मुताबिक राजीव ने जोरा से एक एक्सपेरिमेंट किया है, वह यह है कि सिर्फ दो करोड़ के बजट में नए एक्टर के साथ जोरा को बनाया गया है। राजीव रॉय सस्पेंस थ्रिलर फिल्मों के उस्ताद हैं, ठीक उसी जॉनर में रखकर इन्होने यह फिल्म भी बनाई है।

कहानी

फिल्म में दो कहानियाँ एक साथ चलती दिखाई देती हैं। पहली जोरा नाम का किरदार है अब यह जोरा आदमी है या औरत है इसका फिल्म देखने के बाद ही पता लगाया जा सकता है। दूसरी ओर फिल्म के हीरो रंजीत सिंह (रविंदर कुहर) जो पुलिस इंस्पेक्टर हैं और अपने पिता के हत्यारों का बदला लेना चाहते हैं। रंजीत सिंह के पिता भी पुलिस ऑफिसर होते हैं, जिन्हें जोरा ने मार दिया होता है।

कहानी में कुछ नयापन तो नहीं है, पर फिर भी इसे देखकर अच्छे से टाइम पास किया जा सकता है। बीजीएम अच्छा है। 20 साल के बाद राजीव रॉय ने फिल्मों में वापसी की, वो भी कम बजट के साथ नए एक्टर को लेकर। इस हिसाब से देखें तो राजीव जी की जितनी भी तारीफ करें, उतनी कम है। जोरा को देखकर एक बात तो साफ है कि अभी भी राजीव रॉय एक अच्छी बड़े बजट की फिल्म बना सकते हैं। एक अच्छे टाइम पास के लिए जोरा को एक बार देखा जा सकती है।

क्या है यहाँ खास और कहाँ रह गई कमी

सबसे बड़ी कमी जो थी वो थी फिल्म के स्टार जो कि औसत से कम थे। परदे पर जो ग्लैमर देखने को मिलना चाहिए, उस तरह का ग्लैमर यहाँ दिखाई नहीं देता। यही वजह है कि डायरेक्शन काफी थिन लाइन सा प्रतीत होता है। प्रोडक्शन वैल्यू देखकर ही पता लगता है कि कम है। कहानी ने तेजी के साथ रफ्तार पकड़ी, सस्पेंस भी ठीक-ठाक था बस कमी खलती है तो बड़े स्टार कास्ट की। एक गाना भी है, जो कि काफी अच्छा है। अगर राजीव रॉय यहाँ बड़े स्टार को लेते, तो शायद ये एक अच्छी फिल्म बनकर तैयार होती।

फिल्म की शुरुआत अच्छे से की जाती है। पूरी फिल्म को देखते समय मन में एक सवाल आता है कि आखिर जोरा है तो है कौन। इन सब चीजों का श्रेय जाता है इसके पीआरओ आलोक माथुर को, जिन्होंने हर जगह राजीव रॉय को दिखाया है, जोरा का प्रमोशन करते हुए, फिर चाहे वो प्रिंट मीडिया हो या फिर यूट्यूब पॉडकास्ट, हर जगह राजीव रॉय ही छाए हुए हैं। प्रोडक्शन वैल्यू कमजोर थी, कोई बात नहीं, पर इसके साथ इसका स्क्रीनप्ले, एडिटिंग, राइटिंग और डायलॉग भी कमजोर हैं।

निष्कर्ष

यह फिल्म फिलहाल तो निराश ही करती है, पर फिर भी अगर आपको आज भी पुरानी सस्पेंस थ्रिलर फिल्में देखना पसंद है, तब आप इसे इंजॉय कर सकते हैं। ये फिल्म परिवार के साथ देखी जा सकती है, क्योंकि यहाँ पर किसी भी तरह का कोई भी एडल्ट सीन देखने को नहीं मिलता है। मेरी तरफ से इसे दिए जाते हैं पाँच में से ढाई स्टार की रेटिंग।

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