ये फिल्म दीपावली के बोनस के जैसी ही है। ये फिल्म दीपावली का बोनस भी है और धमाका भी। क्या आप इस फिल्म को दीपावली के पावन पर्व पर फैमिली के साथ बैठकर इंजॉय करने को तैयार हैं। आइये जानते हैं कैसी है ये फिल्म जिसे आईएमडीबी की तरफ से 8.5 स्टार मिले हैं।
दीपावली बोनस की कहानी
कहानी शुरू होती है बोनस से, जो हमें ये याद दिलाता है कि दीपावली आने वाली है। ये बोनस एक ऑफिस में काम करने वाले इंसान पर फोकस है, जो अपने बहुत से सपनों और फैमिली की जिम्मेदारियों के बीच फंसा हुआ है। इस कैरेक्टर को निभाने वाले विक्रांत हैं, जिनको देखकर आपको लगेगा कि ये इंसान बहुत भावात्मक और कन्फ्यूज्ड है।
विक्रांत का कैरेक्टर अपने छोटे-छोटे स्ट्रगल के साथ रिलेट करता है, जैसे ऑफिस में बॉस का प्रेशर, घरवालों का एक्सपेक्टेशन, दीपावली पर कुछ खास करके दिखाने की जिद। कहानी में दीपावली के दिन इसके पास एक अजीब ट्विस्ट वाला बोनस आता है। यहीं से कहानी में एक्शन, इमोशन, कन्फ्यूजन शुरू हो जाता है।
एक्टिंग
विक्रांत ने फिल्म में अपनी एक्टिंग से इम्प्रेस किया है। ये अपनी एक्टिंग के दम पर पूरी फिल्म को एक नई राह देते नजर आते हैं। विक्रांत अपनी एक्टिंग से आपको हंसाते भी हैं और रुलाते भी। रियथ्विका पनीरसेल्वम की एक्टिंग भी फिल्म में काफी प्रभावशाली है।
इन्होंने प्यार और गुस्से दोनों को अच्छे से बैलेंस किया है। हरीश उथमन की एक्टिंग कहानी को सीरियस बनाने का काम करती है। ये फिल्म तो छोटी है, पर फिल्म में छोटी-छोटी चीजों और डिटेलिंग में अच्छे से काम किया गया है।
फिल्म के बहुत से ऐसे सीन हैं, जो हमारी रोजाना की जिंदगी से रिलेट करते हैं। जैसे रविवार शाम, सोमवार की सुबह का डर लाती है।
डायलॉग
फिल्म के डायलॉग आपको हंसाते भी हैं और कहीं-कहीं सोचने पर मजबूर भी करते हैं। मतलब इमोशनल पंच और जोक का बोनस है, पर खुशियों की कोई गारंटी नहीं है। ये फिल्म एक लाइट और असल जिंदगी का टच देती है।
म्यूजिक और सिनेमैटोग्राफी
म्यूजिक और सिनेमैटोग्राफी की बात की जाए तो बीजीएम मारिया जेराल्ड का है, जो फिल्म को एक नया सा फील देता है। सिनेमैटोग्राफी गौतम सेतुराम की है और इन्होंने दीपावली के सीन को बखूबी दिखाया है, जो अपने आप में बहुत आकर्षक दिखता है। फिल्म देखते टाइम लगता है।
कि आप असल में दीपावली के दिन को देखकर मजा ले रहे हैं। लाइट और कलर ग्रेडिंग को इस तरह से हमारे सामने प्रस्तुत किया गया है, जिसे देख ऐसा लगता है कि दीपावली का दिन एक दिन का न होकर कई दिनों तक होता।
डायरेक्शन
फिल्म का निर्देशन जयबाल जे ने किया है, जिसे बहुत अच्छे से किया गया है। इन्होंने फिल्म के कैरेक्टर, आर्ट और ड्रामा पर बहुत फोकस किया है। इन्होंने फिल्म के हर एक सीन से दर्शकों को इमोशनली जोड़ने की कोशिश की है।
फिल्म को देखकर हमें रियल लाइफ जैसी फीलिंग आती है। आप काफी सीन में विक्रांत के सीन से खुद को रिलेट कर पाते हैं, जिससे कहानी डीप और मीनिंगफुल लगती है। कहीं-कहीं पर फिल्म स्लो होती नजर आती है, जिसे थोड़ा फास्ट किया जा सकता है।
दीपावली बोनस आपकी जिंदगी में इमोशनल और रियलिटी लेकर आ रही है। बस आपको थोड़ा पेशेंस रखना होगा। ये स्लो पेस पर इमोशनल फील कराती है। हमारी तरफ से इस फिल्म को पांच में से तीन स्टार दिए जाते हैं।
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