एवरेस्ट पहाड़ हो या फिर खूंखार जंगल, आए दिन हमें बिग फुट जैसे अननोन क्रिएचर के बारे में सुनने को मिलता रहता है।
फिर चाहे भले ही इन घटनाओं की कोई स्पष्ट पुष्टि न हुई हो, लेकिन फिर भी आज यह मानव इतिहास की सबसे मिस्टीरियस घटना बनी हुई है।
और अभी तक यह कोई भी नहीं जानता कि क्या सच में बिग फुट होता है या नहीं, या फिर यह मानव द्वारा फैलाया गया मात्र एक झूठ है।
डायरेक्टर जेम्स चिक ने हॉलीवुड की झोली से एक मिस्टीरियस फिल्म ईजाद की है, जिसका नाम ‘फीट ऑफ डेथ’ है। फिल्म के जॉनर की बात करें तो यह हॉरर और थ्रिलर की कैटेगरी में आता है।
स्टोरी
फिल्म की कहानी जंगल में हो रही रहस्यमई मौतों की घटनाओं से शुरू होती है। जिसमें एक यूएफएस रेंजर और एक सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर भी शामिल हैं, जिन्होंने हाल ही में अपनी जान गंवाई है।
इन सभी की मौत का कारण कहीं न कहीं जंगल है, क्योंकि यह सभी लोग किसी न किसी कारण से जंगल में ही गए थे।
कहानी के मुख्य किरदारों में हमें ‘जेसन’ (एंड्रयू जैकब ब्राउन, विदिन द वॉल्स, पियर्सिंग वाउंड्स) दिखते हैं।
जेसन, जो कि एक पुलिस ऑफिसर की भूमिका निभाते हुए नजर आते हैं, और जंगल में हो रही सभी मौतों का कारण ढूंढने के लिए भी इन्हें ही इसकी इन्वेस्टिगेशन दी जाती है।
डायरेक्टर जेम्स चिक, जो इससे पहले ‘मैन ईटर’ और ‘डेविल कम्स ट्रू’ जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं, हालांकि फिल्म फीट ऑफ डेथ में वह अपना जादू नहीं बिखेर पाए और यह फिल्म पूरी तरह से फीकी नजर आई। मूवी में उस तरह का फीलिंग एलिमेंट नहीं फील कराया जा सका, जो कि डेविल कम्स ट्रू के टक्कर का हो।
फिल्म की कहानी हमें सिर्फ इधर-उधर भटकती हुई ही नजर आती है, जिसे आपने इससे पहले बहुत सारी फिल्मों में पहले ही देख रखा होगा। डायरेक्टर ने दृश्यों को कुछ ज्यादा ही सैचुरेटेड कर दिया, जिससे वे थ्रिलिंग लगने के बजाय काफी बोरिंग दिखते हैं।
अभिनय
फिल्म में सभी ने अपने-अपने रोल को अच्छे से निभाया है, जिसमें मेन रोल में नजर आए एक्टर एंड्रयू जैकब ने अपने रोल में जान फूंक दी है।
फिर चाहे वह मजाकिया बातचीत हो या फिर वह इंटेंस लुक, हमें सभी सिचुएशंस में स्थिर नजर आते हैं और कहीं पर भी अपने किरदार से भटकते हुए नहीं दिखाई देते।
निर्देशन
फिल्म का डायरेक्शन जेम्स चिक ने किया है, जिन्हें इस तरह की फिल्में बनाने का अच्छा एक्सपीरियंस था, हालांकि इस फिल्म में उनसे थोड़ी चूक हुई है और एक काफी अच्छी फिल्म बनाते-बनाते वे चूक गए हैं।
हालांकि इस फिल्म की सिनेमैटोग्राफी काफी अच्छी है और इसके विजुअल्स बेहद कलरफुल नजर आते हैं, पर फिर भी फिल्म की कहानी इन सभी चीजों का साथ नहीं देती।
म्यूजिक
फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक काफी लाइट है, जो कि समय-समय पर दिखाए गए दृश्य के हिसाब से बदलता रहता है। हालांकि कुछ सीन्स में यह अपनी पकड़ भी छोड़ता है, पर ओवरऑल बात करें तो यह ठीक-ठाक है।
निष्कर्ष
अगर आपको मिस्टीरियस फिल्में देखना पसंद है और आप हॉलीवुड फिल्मों के सच्चे फैन हैं, तो आप इस फिल्म को एक बार रिकमेंड कर सकते हैं।
हालांकि इसमें दिखाया गया थ्रिल और हॉरर एलिमेंट उस लेवल का नहीं, जिस लेवल का हॉलीवुड की फिल्मों से एक्सपेक्ट किया जाता है।
रेटिंग
फिल्मीड्रिप की ओर से इस फिल्म को दिए जाते हैं 2.5/5 ⭐⭐
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