इस भागदौड़ और स्ट्रेस भरी दुनिया में हमें एक ऐसे शख्स की जरूरत होती है जिसके आने से हमारी जिंदगी में एक ठहराव सा आ जाए।
ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि इस मसाला, एक्शन, भूत वाली फिल्मों के बीच ऐसी एक फिल्म आ जाए जो आपके दिमाग को शांत कर दे।
जैसे अभी हाल ही में आई मायानगन और लकी भास्कर, जिसमें इमोशंस हैं, फीलिंग्स हैं, मोटिवेशन है, जिनसे हमें अपनी जिंदगी में बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
जिस तरह की फिल्मों को देखकर हमें लगे कि पूर्ण रूप से शांति मिल गई है। ऐसी ही एक फिल्म जियोहॉटस्टार पर एक सच्ची घटना पर आधारित 1 घंटे 45 मिनट की यह फिल्म आपको हिंदी में देखने को मिल जाती है।
कहानी 1946 के दशक में इटली में सेट है। जब वर्ल्ड वॉर 2 खत्म हो गया था। वर्ल्ड वॉर 2 के खत्म होने के बाद इटली में पूरी तरह से भुखमरी फैल गई थी।
जहां एक तरफ लोग भूखे मर रहे थे और तड़प रहे थे, तो ऐसे में एक 7 साल का लड़का अपनी मां के साथ रह रहा होता है। वहां के कई बच्चों को एडॉप्शन के लिए नॉर्थ में भेज दिया जाता है, इस कंडीशन में यह 7 साल का लड़का अपनी मां से बिछड़ जाता है।
इसके बाद उस छोटे बच्चे की मां को यह डर सताता है कि कहीं उसके बच्चे को कोई मार न दे। फिल्म में बहुत सारे ऐसे इमोशनल सीन हैं जो आपकी आंखों से आंसू निकाल दें। फिल्म में एक ऐसी दुखदायी सिचुएशन को क्रिएट किया गया है जो वर्ल्ड वॉर 2 के बाद इटली में देखने को मिली थी।
इसकी कहानी एक सच्ची घटना पर होने के कारण आपको अंदर से झकझोर देगी और काफी इंस्पायर करेगी। फिल्म में ऐसी मांओं को दिखाया गया है जो अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए, तकलीफ भरे निर्णय लेती हैं।
फिल्म के पॉजिटिव और नेगेटिव पॉइंट्स
पॉजिटिव पॉइंट्स
अगर हम एक लाइन में इसका रिव्यू करें, तो यह एक डीसेंट फिल्म है। फिल्म में दिखाए गए 7 साल के लड़के का काम शानदार है। इसकी जितनी भी तारीफ की जाए उतनी कम है। सभी सपोर्टिंग कास्ट ने अपने-अपने रोल को बेहतर तरीके से निभाया है।
फिल्म की कहानी ठीक है, इसका एग्जीक्यूशन भी काफी बेहतरीन तरीके से किया गया है, जिसके अंदर अच्छी तरह से इमोशंस डाले गए हैं। मां और बेटे के बीच की बॉन्डिंग को बहुत अच्छे से प्रेजेंट किया गया है, जो आपको रुलाने में पूरी तरह से कामयाब रहती है। फिल्म का प्रोडक्शन वर्क अच्छा है, और इसकी सिनेमैटोग्राफी 1946 के दशक को अच्छे से दिखाने में कामयाब रही है।
नेगेटिव पॉइंट्स
फिल्म का स्क्रीनप्ले काफी स्लो है, जो कहीं-कहीं पर आपको बोर भी कर देता है। यह फिल्म 20 से 25 मिनट काटी जा सकती थी। अगर आपको पीरियड ड्रामा फिल्में देखना पसंद है, तब यह आपको काफी अच्छी लगेगी। अगर आप एक्शन, मसाला फिल्में देखना पसंद करते हैं, तब आप इस फिल्म से दूर ही रहें।
निष्कर्ष
फिल्म को इस तरह से दिखाया गया है कि बहुत सारे सीन्स में आपकी आंखें नम हो जाएंगी। यह भागने वाली फिल्म नहीं है, बल्कि रुक कर बहुत कुछ सीखने वाली है।
एक सिंपल सी कहानी को मजेदार बनाकर पेश किया गया है। आज के समय में इस तरह की फिल्में नहीं बनतीं। क्योंकि आजकल दर्शकों को थ्रिल, मिस्ट्री और रोमांस का तड़का चाहिए होता है।
इस फिल्म को आप दो वजह से देख सकते हैं, पहला इसका बीजीएम और दूसरा इसमें दिखाए गए बच्चे के परफॉर्मेंस के कारण।
फिल्मीड्रिप की ओर से इस फिल्म को दिए जाते हैं 2.5/5 ⭐⭐.
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