Vanvaas Movie Review: जब माँ बाप बच्चो पर बन जाते हैं बोझ वनवास फिल्म समीक्षा

Written by: Arshi
Publish On: September 19, 2025 3:27 PM (IST)
Vanvaas Movie Review hindi

20 दिसंबर 2024 को अनिल शर्मा के निर्देशन में बनी एक फिल्म रिलीज़ हुई है, जिसका नाम है वनवास। फिल्म की कहानी के लेखक हैं अमजद अली, अनिल शर्मा, सुनील सिरवैया। कई सालों बाद बॉलीवुड में एक पारिवारिक फिल्म बनाई गई है, जिसे आप अपनी फैमिली के साथ इंजॉय कर सकते हैं।

वनवास की कहानी का कॉन्सेप्ट आपको पूरी तरह से इमोशनल कर देगा। आज की मॉडर्न जेनरेशन किस तरह अपने ही माँ-बाप को बोझ समझने लगी है। एक सीनियर ऐज में पहुँचने पर जब पेरेंट्स को सबसे ज़्यादा अपने बच्चों की ज़रूरत होती है, उस टाइम ज्यादातर खुद को अकेला पाते हैं।

इसी बहुत ही इमोशनल और सीरियस कॉन्सेप्ट को लेकर मेकर्स ने एक फिल्म बनाई है। अपने पुराने मास कॉन्टेन्ट से हटकर अनिल शर्मा कुछ अलग लेकर आए हैं। आइए जानते हैं इस फिल्म के बारे में, कैसी है यह फिल्म और क्या आपको अपना कीमती समय इस फिल्म को देना चाहिए?

फिल्म के निर्माता के बारे में

सालों बाद इस तरह के हार्ट टचिंग टॉपिक पर फिल्म बनाने वाले निर्माता कोई और नहीं, बल्कि बॉलीवुड के नामी गदर, तहलका, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों, वीर, द हीरो, महाराजा और अपने जैसी फ़िल्में देने वाले फिल्म इंडस्ट्री के एक बेहतरीन डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और लेखक अनिल शर्मा हैं।

इन्होंने पहले भी कई बेहतरीन फिल्में बॉलीवुड के नाम की हैं, जिनमें से ज्यादातर फिल्में हिट फिल्मों की कैटेगरी में आती हैं और लोगों के द्वारा पसंद की गई हैं।

अनिल शर्मा के बेटे सहित बेहतरीन कास्ट

इस फिल्म में आपको नाना पाटेकर मुख्य भूमिका में नज़र आएँगे, जिनके चारों ओर फिल्म की पूरी कहानी घूमती है। इनके साथ ही फिल्म के निर्माता अनिल शर्मा के बेटे उत्कर्ष शर्मा, आश्विनी कालसेकर, राजपाल यादव, श्रुति मराठे, सिमरत कौर रंधावा, स्नेहल दीक्षित मेहरा, खुशबू सुंदर, प्रशांत बजाज, केतन सिंह आदि कलाकार देखने को मिलेंगे।

फिल्म की कहानी

इस फिल्म की कहानी आपको आज से 24 साल पहले आई फिल्म बागबान की याद दिला देगी। जिस तरह से फिल्म की शुरुआत होती है, आपको त्यागी जी नाम के कैरेक्टर से इंट्रोड्यूस कराया जाएगा, जिनके तीन बच्चे भी दिखाए गए हैं, जिनका नाम सोनू, बबलू और छोटका होता है।

शुरुआत में इनकी फैमिली की फाइनेंशियल हालत बहुत अच्छी नहीं होती है, जिसकी वजह से कई तरह की प्रॉब्लम्स आती हैं, लेकिन फिर धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाता है। फैमिली में एक स्कीम भी बन गई है, जिससे रेगुलर फाइनेंशियल सपोर्ट भी है, लेकिन जो मेन प्रॉब्लम है, वह त्यागी जी की डिमेंशिया की बीमारी है।

बच्चे अपने ही पिता को उनकी बीमारी की वजह से बोझ समझने लगते हैं। एक दिन तीनों बच्चे अपने पिता को लेकर बनारस जाते हैं, लेकिन उन्हें साथ में वापस नहीं लाते हैं। इस सीन को फिल्म में जिस तरह से दिखाया गया है, आपके आँसू निकलने से कोई नहीं रोक सकता। पिता किसी भी हालत में इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं होता है कि उसके बच्चे उसे छोड़कर चले गए हैं।

इसके बाद फिल्म में आपको दूसरा मेन कैरेक्टर उत्कर्ष शर्मा देखने को मिलेगा, जिसका रिश्ता त्यागी जी के साथ ठीक वैसा ही देखने को मिलेगा, जैसा बागबान में अमिताभ के साथ सलमान खान के द्वारा निभाया गया कैरेक्टर देखने को मिला था। कुछ न होकर भी सब कुछ वाला रिश्ता।

क्यों देखना चाहिए ये फिल्म?

यह फिल्म सोसाइटी के हर इंसान के लिए बनी है, चाहे आप किसी भी ऐज ग्रुप से बिलॉन्ग करते हैं। किस तरह एक पिता कड़ी मेहनत के बाद खूब सारे अरमान लेकर घर को बनाता है, जहाँ अपनी फैमिली के साथ एक खुशहाल जीवन जीने का सपना एक पिता का होता है और एक पिता यह सब कुछ करता भी है, लेकिन क्या होगा जब अचानक से सब कुछ एकदम उल्टा हो जाए।

कुछ ऐसी ही दिल को गमगीन करने वाली कहानी आपको इस फिल्म में देखने को मिलेगी, जिसमें त्यागी जी की वाइफ की अचानक से मौत हो जाने पर जब एक पिता डिमेंशिया से जूझने लगता है, तो इसके खुद के बच्चे अपने पिता को बोझ समझने लगते हैं। यह सब देखकर आपका दिल भर आएगा।

कैसी है प्रोडक्शन क्वालिटी?

फिल्म का स्क्रीनप्ले, सिनेमाटोग्राफी, म्यूज़िक, सब कुछ एकदम दमदार है। जो कुछ भी आपको इस फिल्म में देखने को मिलेगा, एक अच्छा एक्सपीरियंस देगा। फिल्म में आपको एक या दो नहीं, बल्कि खूब सारे ऐसे सीन्स देखने को मिलेंगे, जो आपको रुला देंगे।

निष्कर्ष

हम कह सकते हैं कि ये एक ऐसी फिल्म है, जिसकी हमारे समाज को बहुत ज़्यादा ज़रूरत थी। हमारे समाज को उसका आईना दिखाने वाली फिल्म, जिनका पॉज़िटिव इफेक्ट बहुत ज़रूरी है। अगर आप सीरियस टॉपिक वाली इमोशनल कहानी देखना चाहते हैं, तो इस फिल्म को ज़रूर देखें।

इस फिल्म के लिए हम बस इतना ही कहेंगे कि ये एक मस्ट वॉच फिल्म है, जिसे ज़रूर देखना चाहिए। फिल्म को मेरी तरफ से पाँच में से चार स्टार की रेटिंग दी जाती है।

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