Sky Force Hindi Review: जानिए अक्षय कुमार की स्काईफ़ोर्स फाइटर से बेहतर है या नहीं ?

Written by: Amir khan
Publish On: September 24, 2025 3:41 PM (IST)
Sky Force Movie Review Hindi

160 करोड़ के बजट में बनी ‘स्काई फोर्स’ को सिनेमाघरों में 24 जनवरी 2025 को रिलीज कर दिया गया है। जिसका डायरेक्शन दिया है संदीप केवलानी और अभिषेक अनिल कपूर ने। फिल्म में हमें अक्षय कुमार के साथ-साथ वीर पहाड़िया, सारा अली खान, निमरत कौर देखने को मिलते हैं। जियो स्टूडियो, मैडॉक फिल्म्स के प्रोडक्शन में बनाई गई इस फिल्म का रनिंग टाइम 2 घंटे 5 मिनट का है।

कहानी

कहानी 1965 की भारत और पाकिस्तान के युद्ध के बीच की है। इस युद्ध में भारत और पाकिस्तान दोनों का ही यह दावा था,कि इस जंग को हमने जीता था भारत का यह कहना था कि हमने पाकिस्तान के 73 एयरक्राफ्ट को मार गिराया और खुद के 35 एयरक्राफ्ट गवा दिए थे । उधर पाकिस्तान का कहना था कि उसने अपने 19 एयरक्राफ्ट को गंवाकर भारत के 104 एयरक्राफ्ट को मार गिराया था।

स्काई फोर्स में दिखाया गया है कि एक रात पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट भारत के भारतीय एयरफोर्स के ऊपर अटैक कर देते हैं। जिस कारण इंडियन एयर फोर्स को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। पर अहमद नाम का पाकिस्तानी एयर फोर्स ऑफिसर भारत के सैनिकों के द्वारा पकड़ा जाता है अब अहमद से पूछताछ की जा रही है यही से कहानी पास्ट में चली जाती है।

विंग कमांडर कुमार ओम आहूजा की किरदार में अक्षय कुमार वहीं दूसरी ओवर स्क्वाड्रन लीडर टी. कृष्णा “टैबी” के कैरेक्टर में वीर पहाड़िया दिखाई दे रहे हैं और पाकिस्तानी ऑफिसर अहमद के रूप में शरद केलकर दिखाई देते हैं।

कहानी अपने पास्ट में जाकर 1965 की जंग को दिखाती है जहां पर दिखाया गया है की भारतीय सैनिक ‘कुमार ओम आहूजा’ को पाकिस्तानियों के द्वारा पकड़ लिया जाता है और उसके साथ किस तरह से पाकिस्तानी सैनिक खराब बर्ताव करते हैं। यह कहानी एक असल हादसे पर आधारित है तो उस समय भारत के पास फाइटर हंटर था वहीं पाकिस्तानियों के पास अमेरिका के द्वारा दिया गया f8 f104 था और यह उस टाइम का सबसे हाईटेक एयरक्राफ्ट हुआ करता था।

भारतीय एयरक्राफ्ट ने अपने हंटर के माध्यम से पाकिस्तानियों से लोहा लेकर जीत दर्ज की थी ,तब एक इंडियन ऑफिसर पाकिस्तानी सैनिकों के द्वारा पकड़ लिया जाता है। अब किस तरह से इस सैनिक को परमवीर चक्र मिलता है क्या अक्षय कुमार अपने सैनिक को भारत वापस ला पाते हैं यही सब कहानी में देखने को मिलता है।

स्काई फोर्स का पहला और दूसरा हिस्सा

कहानी अपने फर्स्ट हाफ में दर्शकों को जोड़ कर रखती है वही अपने दूसरे हाफ में आपको काफी इमोशनल कर देती है यह आपको सोचने में मजबूर कर देती है कि किस तरह से हमारे इंडियन एयर फोर्स अपनी जान देकर देश के लिए बलिदान देते हैं।

अक्षय कुमार की बहुत टाइम के बाद हमें देशभक्ति से भरी फिल्म दिखाई दे रही हैं। अक्षय अपने डायलॉग के साथ काफी सफल दिखाई पड़ते हैं। वहीं निमरत को अक्षय कुमार की पत्नी के रूप में दिखाया गया है वीर पहाड़िया की पत्नी के रूप में हमें सारा अली खान देखने को मिलती है सारा अली खान और निमरत कौर का फिल्म में कुछ खास रोल नहीं है।

स्काई फोर्स पॉजिटिव ओर नेगेटिव पॉइंट

अगर कंपेयर किया जाए वीर पहाड़िया और शरद केलकर के बीच तो यहां शरद केलकर वीर पहाड़िया पर भारी पड़ते दिखाई पड़ रहे हैं शरद केलकर ने एक छोटे से रोल के माध्यम से फिल्म में एक अलग जगह बनाई है। जो की फिल्म का एक प्लस पॉइंट कहा जा सकता है वीर पहाड़िया अपने पायलट के रोल में फाइटर फिल्म के रितिक रोशन को कॉपी करते दिखाई दे रहे हैं।

फिल्म देखते समय कहीं-कहीं पर ऐसा लगता है कि अक्षय कुमार अपने डायलॉग को टेलीप्रॉम्प्टर के माध्यम से पढ़ रहे हैं बॉलीवुड में इससे पहले भी इस तरह की बहुत सारी एरियल फिल्में बनाई जा चुकी है अक्षय कुमार की स्काई फोर्स में हमें ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिलता है जो कि इससे पहले ना देखा हो अगर स्काई फोर्स और रितिक रोशन की फाइटर को देखा जाए तो इसमें फाइटर फिल्म बेस्ट है।

स्काई फोर्स का सेकंड हाफ बहुत इमोशनल है जो आपके दिल को छू जाता है पहला हाफ थोड़ा स्लो तो वही सेकंड हाफ अपने इमोशंस एंगल से पूरी तरह से जोड़कर रखता है जिसे लता मंगेशकर और जी.वी. प्रकाश अपने गानों के माध्यम से और भी आकर्षित बना रहे है जो की देश भक्ति जगाने का काम करती है।

पर एक बार फिर यहां पर कहना चाहते हैं कि यहां पर हमें कुछ भी ऐसा नया देखने को नहीं मिलता है जो की इससे पहले ना देखा हो। फिल्म में अक्षय कुमार ने कुछ भी नया नहीं किया , जिस तरह से इस बार उनसे उम्मीद की जा रही थी इन्होंने उन उम्मीदों पर पूरी तरह से निराश किया है। अब अक्षय कुमार की जोली एलएलबी और हेरा फेरी से ही उम्मीद की जा सकती हैं।

फिल्म की लंबाई कम होने की वजह से कैरेक्टर डेवलपमेंट बहुत ही कम है बहुत से कैरेक्टर को तो जानने का मौका ही नहीं मिलता। म्यूजिक और डायलॉग बेहतर बनाया जा सकता था वीएफएक्स और सीजीआई वैसा ही है जैसे की हमारी फिल्मो में होता है फिल्म का आखिरी 20 से 25 मिनट में आपको कुछ अलग देखने को मिलता है यहाँ कुछ नया करने की कोशिश की गयी है जो की काबिले तारीफ है। फाइटर जेट वाली फिल्में अगर आपने देख रखी है तब आपको स्काई सीक्वेंस देखने में आसानी रहेगी।

निष्कर्ष

रन टाइम कम होने की वजह से फिल्म पूरी तरह से इंगेजिंग है जो अपने लास्ट के कुछ मूवमेंट से आपको इमोशनली भी कर सकती है वीएफएक्स सीजीआई बहुत अच्छे तो नहीं है पर फिर भी डीसेंट है इस फिल्म का सिनेमैटिक एक्सपीरियंस लेने के लिए आप इसे थिएटर में ही जाकर देखे वो भी फैमिली के साथ। ज्यादातर इस फिल्म को सभी समीक्षकों ने 4 से 3.5 स्टार दिए हैं पर फ़िल्मी ड्रिप की ओर से दिए जाते है पांच में से तीन स्टार।

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