फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी के एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी इमरान हाश्मी की फिल्म ग्राउंड जीरो 25 अप्रेल से भारत के सभी सिनेमाघरों में रिलीज़ कर दी गई है।
इमरान हाशमी यहां नरेंद्र नाथ धर दुबे के किरदार में है जो की बीएसएफ का जवान है।कहानी में 2001 में हुए संसद हमले के मास्टर माइंड गाजी बाबा को खतम करने के ओप्रशन को अंजाम दिया गया है। आइये जानते है कैसी है ये फिल्म क्या फिल्म हमें सही इनफार्मेशन देने में कामयाब रही है। क्या इमरान हाशमी की ये फिल्म आपको देखनी भी चाहिए या नहीं ?
ग्राउंड जीरो रिव्यु
ग्राउंड जीरो का ट्रेलर जब से रिलीज़ किया गया है तब से इमरान हाशमी के फैन में इनको बीएसएफ के जवान के रूप में देखने के लिए एक अलग सा उत्साह देखा जा रहा था क्यों की इससे पहले इमरान हशमी को इस तरह के रोल को करते नहीं देखा गया था। कहानी 2001 में हुए पार्लमेंट अटैक को दर्शाती है इसी का जवाब देने के लिए इमरान हमलावरों पर जवाबी हमला करने वाले है। अब कैसे इमरान इस बड़े ओप्रशन को लीड करते है इमरान फिल्म में एक असल कैरेक्टर को प्ले करते दिखाई दे रहे है। यह एक इंटेंस थ्रिलर एक्शन फिल्म है।
फिल्म में बहुत सी इंटरनल चीज़े देखने को मिलती है,उदाहरण के लिए किस तरह से हमारी सरकार काम करती है। आतंकवादी पर जवाबी हमला किस प्रकार से किया जाता है जब देश पर किसी भी तरह का आतंकवादी हमला होता है उस समय हमारी सरकार किस तरह से फैसला लेती है इसे ख़तम करने के लिए।

22 अप्रेल को कशमीर में जो अटैक हुआ है,और जिस तरह से फिल्म में एक डायलॉग दिखाया गया है के ‘कशमीर तो हमारा है क्या यहां के लोग भी हमारे है ‘
इसका जवाब हमें आदिल हुसैन के रूप में मिल चुका है।तो हर एक कशमीरी को गलत नहीं बोला जा सकता।कहानी में यही देखने को मिलता है के जिस कशमीर के लिए हम लड़ रहे है क्या यहां के लोग हमारा उतना साथ देते है या नहीं।
इस तरह की फिल्मे पहले भी बनाई जा चुकी है जहा देश भक्ति फौजी की ज़िंन्दगी वो किस तरह से काम करता है। कुछ भी निर्णय लेने से पहले सरकार के हाथ किस तरह से बंधे होते है । तब हमारे मन में बस एक ही सवाल उठता है के जब सामने वाला देश ये सब कर सकता है तो हम आखिर करने में क्यों नाकामयाब रहते है। इमरान हाशमी ने अपने कैरेकटर को बहुत अच्छे से निभाया है इसकी जितनी भी तारीफ की जाए वो कम है।
टेक्नीकल एस्पेक्ट
तेजस प्रभा विजय देवस्कर का निर्देशन शानदार है सिनेमाटोग्राफी के माध्यम से कशमीर की सुंदरता को और भी अच्छे से निखारा गया है। फिल्म के सभी एक्शन सीक्वेंस की कोरियोग्राफी बढ़िया तरीके से की गयी है। बीजीएम की बात की जाये तो वो भी कुछ हद तक ठीक ठाक सा है।
निष्कर्ष
देशभक्ति से भरी रियल मुद्दों को उजाकर करती फिल्मे देखने का शौक है आपको तब आप इमरान की इस फिल्म को देख सकते है कहानी असल इंसिडेंट पर आधारित है और इसे उसी तरह से प्रस्तुत भी किया गया है यह कोई मास मसाला इंटरटेनमेंट फिल्म नहीं है जिस वजह से उतने दर्शक तो फिल्म को नहीं मिलने वाले पर हां मेरी नज़र में यह एक डिसेंट फिल्म है जिसे एक बार तो देखा ही जा सकता है।
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