अजय देवगन की फिल्म रेड 2018 में रिलीज़ की गयी थी जिसने लगभग 150 करोड़ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन किया था पुरानी फिल्म की स्टोरी ने दर्शको के दिमाग को घुमाने का काम किया था तो क्या अब ये रेड २ भी उसी तरह से हमें रोमांच और थ्रिल से भर देगी आइये पता करते है क्या है ख़ास रेड २ की कहानी में।
रेड २ रिव्यु
अजय देवगन की पिछली रिलीज़ फिल्मो को अगर देखे तो यह सभी अच्छा परफॉर्मेंस करती दिखाई दी इन फिल्मो ने बॉक्स ऑफिस पर भले ही कम कमाई की हो पर लोगो को दिल से पसंद आयी है रेड २ की अगर बात की जाये तो क्या ये रेड वन से अच्छी है या नहीं तो अगर अपने पहले ही रेड वन को देख रक्खा है तो अब रेड २ रेड वन के आगे एवरेज फिल्म की तरह दिखाई देगी। और अगर रेड वन नहीं देखि है तो यह डेफिनेटली बढ़िया ही लगने वाली है।
कहानी
इनकम टेक्स डिपार्टमंट के डिप्टी कमिश्नर अमय सिंह पटनायक का वही काम है जो की रेड १ वन में देखने को मिला था एक पॉवरफुल दबंग राजनेता के घर पर रेड मारना और रेड के बदले अपना ट्रांसफर करवा लेना। कई वर्षो से इस काम को अमय करते आरहे है यह काम इनकी ज़िंदगी का एक हिस्सा सा बन गया है।
जिससे अब इनके परिवार को किसी भी तरह का फर्क नहीं पड़ता के अमय किस तरह से अपनी जान जोखिम में डालकर रेड डालते है। अमय अब मनोहर शंकर दादा भाई के घर पर रेड डालने पहुंचे है ये जहा रहते है इस पूरे एरिये में इनका ही वर्चस्व है इन्ही का राज चलता है।

दादा भाई मंत्री और जनता की नज़र में मसीहे से कम नहीं है दादा भाई ने कभी कोई गलत काम नहीं किये इनका रिकॉर्ड एक दम कोरे कागज़ जैसा साफ़ है पर अमय एक मास्टर माइंड दिमाग वाला इंसान है ये यह बात अच्छी से जानता है की ज्यादा मीठा मतलब होता है शुगर की बीमारी के होने का खतरा।अमय यानी अजय देवगन को एक बात अच्छे से पता है के दादा भाई ने बहुत सारा काला धन छिपा कर रक्खा है।
पर अमय का मुकाबला इस बार बहुत बड़े शातिर राजनेता से है जो नेता होने के साथ साथ दस सर रावण के जैसा दिमाग भी रखता है। राजा भाई को अपने एरिया के सभी लोगो का साथ हासिल है।अब इतने बड़े और शातिर मिजाज़ वाले राजनेता से अमय किस तरह से जीत हासिल करता है यही सब हमें आगे फिल्म में देखने को मिलता है।
क्या अच्छा है और क्या है बुरा रेड २ में
फिल्म की एक अच्छी बात ये है के जिस तरह रेड वन थी,कुछ हद तक उसी तरह से रेड २ ने भी अपनी कहानी को पेश किया है।फिल्म में ये देख कर अच्छा लगता है के अगर आप ईमानदार है तो आपके सामने खड़ा इंसान कितना भी ताकतवर क्यों न हो आप उसके सामने तन कर खड़े हो सकते है वो भी बिना डरे। यहाँ नेता की लोमड़ी की चालाकी और अजय अमय की खरगोश की चाल इस चूहे बिल्ली के खेल को देखकर अच्छा लगता है।
जहा पहले हाफ में फिल्म की कहानी बहुत तेज़ी के साथ आगे बढ़ती है तो दूसरे हिस्से में यह काफी स्लो सी हो जाती है। दूसरे हिस्से को देख कर ऐसा लगने लगता है के डायरेक्टर कुछ भूल से गए है और कहानी ढीली पड़ने लगती है। पर धीरे-धीरे फिल्म ट्रक पर आजाती है और कलाइमेक्स में सब कुछ ठीक हो जाता है। एक कमी यहाँ ये भी हुई है के करप्शन दिखाने से ज्यादा यहाँ नेता जी ने जो काले कारनामे किये है उसे बेमतलब दिखाने की कोशिश की जाती है।

जिसे देख कर ऐसा लगने लगता है के यहाँ राजकुमार गुप्ता क्राइम थ्रिलर, ड्रामा की जगह इन्वेस्टिगेटिव थ्रीलर बनाने में लगे हुए है। एक भावत्मक टच डालने के लिए मंत्री किस तरह से महिलाओ का शोषण करते है दिखाया गया है,पर इसे देख कर ऐसा लगता है के इसकी बिलकुल भी ज़रूरत नहीं थी फिल्म के अंदर।
परफॉर्मेंस
रेड २ में अजय देवगन के जितने भी फैन है इन फैन को वो सब कुछ देखने को मिलेगा जो अजय देवगन की फिल्मो में देखने को मिलता है जैसे इनका फेस इंप्रेशन दमदार डायलॉग टेंशन देने वाले सीन मैदान,शैतान फिल्मो की तरह ही यहाँ अजय देवगन ने अपने काम को अच्छे से किया है।
अजय देवगन के साथ काम करने वाला लल्लन सुधीर (अमित सियाल)का काम भी बढ़िया है जिस तरह से इन्होने फिल्म में देशी भाषा का प्रयोग किया है इसे देख कर तो यही लगता है के इनके कुछ और सीन फिल्म में देखने को मिल जाते तो अच्छा रहता।
जिस तरह से दादा भाई के रूप में रितेश देहसमुख ने अपने किरदार को निभाया है इसे देख कर लगता है के भविष्य में इस तरह के और भी रोल रीतेश को निभाना चाहिए। एक ऐसा राजनेता जो अपने दिन की शुरुवात करता है अपने माँ की पूजा करके रितेश इस बात को अच्छे से जनता है के अगर वो ये सब करेगा तो जनता उसे भगवान बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
सौरभ शुक्ला काम कांफी शानदार है वो जब भी स्क्रीन पर दिखते है इन्हे देख कर मज़ा आता है। यश पाल शर्मा भी एक दो सीन में चमकते हुए दिखाई देते है। प्रिया पाठक ने भी यहाँ अपने काम को अच्छे से निभाया है। वाणी कपूर और रजत कपूर के पास इतना करने को कुछ ख़ास था नहीं। फिल्म के कुछ डायलॉग जो अजय देवगन और अमित के द्वारा बोले गए है वो काफी अच्छे है।
निष्कर्ष
थोड़ा बहुत ऊपर निचे करके एक बार तो रेड २ को देखा ही जा सकता है यह बहुत ज़ादा एक्स्ट्रा ऑर्डरली चीज़े प्रजेंट नहीं करती,अगर आप अभी के टाइम की बिना सर पैर वाली फिल्मो को देख कर बोरियत महसूस क्र रहे है तो यह फिल्म आपको अच्छी लगने वाली है।इसे रेड १ के मुकाबले कमज़ोर कहा जा सकता है,पर यह खराब फिल्म भी नहीं है पर एक बात का ध्यान रखना है के इसे रेड १ फिल्म की तरह उम्मीदे लेकर नहीं देखना है।
मेरी तरफ से रेड २ को दिए जाते है पांच में से तीन स्टार की रेटिंग।
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