5 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म “The Conjuring: Last Rites” कंज्यूरिंग फ्रेंचाइजी की चौथी फिल्म है, इस लिहाज से इसे ‘कंज्यूरिंग 4’ भी कहा जा सकता है। इस चौथी किस्त को माइकल शेव्स ने डायरेक्ट किया है।
‘The Conjuring: Last Rites’ के मुख्य कलाकारों की बात करें तो इस बार भी हर बार की तरह पैट्रिक विल्सन और वेरा फार्मिगा एड और लॉरेन वॉरेन के किरदार में मौजूद हैं। इसके साथ ही बेन हार्डी, एलियट कॉवन, शैनन कुक, कीला लॉर्ड कैसिडी, स्टीव कूल्टर, रेबेका काल्डर, ब्यू गैड्सन और मिया टॉमलिंसन जैसे कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं। चलिए जानते हैं क्या है फिल्म की कहानी और करते हैं इसका डिटेल रिव्यू।
कहानी (स्पॉइलर फ्री)

‘द कंज्यूरिंग: लास्ट राइट्स’ फिल्म हमें ले जाती है 1964 में, जहां विक्टोरिया नाम की एक पीड़ित महिला को एड और लॉरेन वॉरेन के साथ बात करते हुए दिखाया जाता है। विक्टोरिया बताती है कि उसे अपने माता-पिता की तरह ही कुछ अजीब और डरावनी आकृतियां दिखाई देती हैं। जैसे-जैसे एड और लॉरेन इस जांच को आगे बढ़ाते हैं, विक्टोरिया की जिंदगी से जुड़ी कई परतें खुलकर सामने आती हैं।
एक महत्वपूर्ण मोड़ पर, लॉरेन विक्टोरिया के कमरे में जाकर यह पता लगाने की कोशिश करती हैं कि आखिर कौन सी आत्मा उसे परेशान कर रही है। इस दौरान लॉरेन गर्भवती हैं और जैसे ही वह आत्मा से बात करने की कोशिश करती हैं, वह आत्मा उन्हें अपने शिकंजे में जकड़ लेती है और उनके नवजात शिशु को निशाना बनाती है।
इस घटना के बाद कहानी 1986 के पेंसिल्वेनिया में एक नए परिवार, स्पर्लस फैमिली, पर केंद्रित हो जाती है। इस परिवार की युवा लड़की हैदर (कीला लॉर्ड कैसिडी) के हाल ही में चर्च में ‘कन्फर्मेशन’ यानी एक धार्मिक संस्कार की प्रक्रिया हुई है। उसके जन्मदिन पर, उसके दादा-दादी उसे एक पुराना, बड़ा सा शीशे वाला एक सिंगारदान (ड्रेसिंग टेबल) तोहफे में देते हैं। इसी की वजह से घर में अनहोनी और डरावनी घटनाएं होनी शुरू हो जाती हैं।

वहीं दूसरी ओर, एड और लॉरेन अब पेंसिल्वेनिया में रह रहे हैं और उन्होंने पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेशन का काम छोड़कर एक कॉलेज में लेक्चरर की नौकरी शुरू कर दी है। उनकी बेटी जूडी (मिया टॉमलिंसन) अब बड़ी हो चुकी है और उसमें भी अपनी माँ की तरह पैरानॉर्मल शक्तियां हैं। जब वेस्ट पिटस्टन में स्पर्लस परिवार के साथ हो रही घटनाएं बहुत खतरनाक हो जाती हैं,
तो चर्च के फादर जेनसन एड और लॉरेन से मदद मांगने आते हैं। शुरू में वे मना कर देते हैं, लेकिन जब यही परेशानी उनकी अपनी बेटी जूडी को भी प्रभावित करने लगती है, तो एड और लॉरेन को एक बार फिर से उसी अंधेरे से लड़ना पड़ता है जिससे वे दूर भाग रहे थे।
क्या एड और लॉरेन स्पर्लस परिवार को बचा पाएंगे? क्या जूडी पर मंडरा रहा खतरा इसी केस से जुड़ा है? यह सब जानने के लिए आपको फिल्म जरूर देखनी चाहिए।
क्या इस बार भी निर्देशन में है दम?
डायरेक्टर माइकल शेव्स हॉरर फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, जिन्होंने ‘द कर्स ऑफ ला ल्लोरोना’ (2019), ‘द कंज्यूरिंग 3’ (2021) और ‘द नन 2’ (2023) जैसी फिल्में बनाई हैं।

इनके एक्सपीरियंस का फायदा फिल्म को मिला है। क्योंकी मूवी में जंप स्केर से लेकर माहौल बनाने तक, हर चीज बहुत बढ़िया तरीके से की गई है। स्क्रिप्ट राइटर केरी हेस (जिन्होंने इससे पहले की कंज्यूरिंग फिल्में लिखी हैं) ने इस बार भी एक दमदार और रहस्यमयी कहानी तैयार की है।
तकनीकी पहलू
तकनीकी रूप से फिल्म काफी मजबूत है। ‘A Quiet Place: Day One’ जैसी शानदार फिल्म की एडिटिंग करने वाले अनुभवी एडिटर ग्रेगरी प्लॉटकिन ने ‘द कंज्यूरिंग: लास्ट राइट्स’ को एडिट किया है और उनका काम पूरी तरह से लाजवाब है। भले ही फिल्म की कुल लंबाई 2 घंटे 15 मिनट है, लेकिन उनकी टाइटिंग और पेसिंग की बदौलत कहानी कहीं भी बोरिंग नहीं होती और दर्शकों को बांधे रखती है।
फिल्म का स्क्रीनप्ले इयान गोल्डबर्ग, रिचर्ड नैंग, डेविड लेस्ली जॉनसन-मैकगोल्ड्रिक ने लिखा है जो कि कई मायनों में लाजवाब है। उदाहरण के लिए, वह दृश्य जहां जूडी एक स्टोर में अपना कॉस्ट्यूम बदलने जाती है, यकीन मानिए वह काफी डरावना है।

इसके अलावा, फिल्म की सिनेमैटोग्राफी इस बार भी बेहद दमदार है। अंधेरे और रहस्यमयी माहौल को बनाने के मामले में कंज्यूरिंग फ्रेंचाइजी हमेशा से ही सबसे ज्यादा मार्क्स हासिल करती आई है और इस किस्त में भी यह परंपरा कायम रही है।
फिल्म के कमजोर पक्ष
- अधूरे किरदार: फिल्म का दूसरा हाफ स्पर्लस परिवार पर केंद्रित है, जिसमें आठ सदस्य हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर किरदारों को पूरी तरह से डेवलप नहीं किया गया है।
- बैकग्राउंड म्यूजिक: पिछली फिल्मों के मुकाबले इस बार का बैकग्राउंड स्कोर थोड़ा हल्का लगता है, जिससे डर का असर कुछ कम हो जाता है।
- जल्दबाजी वाला क्लाइमेक्स: फिल्म का अंतिम हिस्सा और शैतानी ताकत का अंत थोड़ा जल्दबाजी में लगता है। इसे और विस्तार दिया जा सकता था।
फिल्म की अच्छी बातें
- कहानी की बनावट: दो अलग-अलग टाइमलाइन और कई किरदारों के बावजूद, कहानी उलझती नहीं है और दर्शकों को पूरे वक्त बांधे रखती है।
- बजट: फिल्म का बजट पिछली किस्तों के मुकाबले ज्यादा महसूस होता है, जिससे विजुअल एक्सपीरियंस और भी बेहतर हुआ है।
- शानदार अभिनय: पैट्रिक विल्सन और वेरा फार्मिगा एक बार फिर अपने किरदार में पूरी तरह से घुल-मिल गए हैं। उनका अभिनय इतना असली लगता है कि लगता है वे असल जिंदगी के भूत-विशेषज्ञ हैं।
- सच्ची घटना पर आधारित: फिल्म की कहानी भी एक सच्ची घटना पर आधारित है, जिसका जिक्र फिल्म की शुरुआत में ही हो जाता है, जो दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ा देता है।

निष्कर्ष
अगर आप हॉरर फिल्मों के शौकीन हैं या पैरानॉर्मल एक्टिविटीज में दिलचस्पी रखते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए ही है। भले ही इसे A सेर्टिफिकेट के साथ रिलीज़ किया गया हो पर फिर भी फिल्म में सिर्फ एक छोटा सा किस सीन है, इसके अलावा कोई भी अश्लील दृश्य नहीं है, जिससे अगर आप चाहें तो इसे परिवार के साथ आसानी से देख सकते हैं। मैं यह तो नहीं कहूंगा कि यह फ्रेंचाइजी की सबसे बेस्ट फिल्म है, लेकिन फिर भी यह पिछली सभी फिल्मों के बराबर की टक्कर लेती हुई दिखती है। हॉरर फैंस इसे बिल्कुल भी मिस न करें।
मेरी रेटिंग: 4/5
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