4 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई एक नई फ़िल्म ‘व्हाइट बर्ड’ है। फ़िल्म की लंबाई तकरीबन 2 घंटे की है, जिसका जॉनर युद्ध और एडवेंचर है। इसका निर्देशन ‘मार्क फ़ॉस्टर’ ने किया है, जिन्होंने इससे पहले 2013 में आई फ़िल्म “वर्ल्ड वॉर ज़ेड” और “द काइट रनर” जैसी मूवीज़ का निर्देशन किया है। फ़िल्म की कहानी जूलियन के किरदार पर आधारित है, जो अपने हाई स्कूल में घुल-मिल नहीं पा रहा, जिससे उसकी ज़िंदगी प्रभावित हो रही है। इसी पर फ़िल्म की कहानी बुनी गई है।
फ़िल्म की कहानी में मुख्य किरदार जूलियन (ब्राइस घेसर) है, जो एक हाई स्कूल स्टूडेंट है। उसका स्कूल हाल ही में बदला है, और वह हाई स्कूल में पहुंचा है। लेकिन वह अपनी ज़िंदगी को न तो ठीक से इंजॉय कर पा रहा है और न ही अपनी स्टूडेंट लाइफ़ को। इसके बारे में उसकी दादी ‘नोना’ (हेलेन मिरेन) को पता चलता है, और वह जूलियन से बात करने की कोशिश करती हैं। शुरू में जूलियन अपनी दादी की बात को अनदेखा करता है। इसके बाद उसकी दादी उसे समझाने के लिए एक नया रास्ता चुनती हैं और अपनी बीती ज़िंदगी के बारे में जूलियन को शुरू से बताना शुरू करती हैं।
यह कहानी द्वितीय विश्व युद्ध के समय की है, जब नोना एक छोटी बच्ची थी। उस समय हिटलर के द्वारा यहूदियों को मृत्यु के घाट उतारा जा रहा था। चूंकि नोना भी एक यहूदी परिवार से ताल्लुक रखती थी, इसलिए उन्हें भी कैद करके रखा गया था। यहीं पर एक नाज़ी परिवार का बच्चा नोना की मदद करता है और उन्हें अपने घर में एक साल तक छुपाकर रखता है। इस दौरान नोना की कहानी में और भी कई ट्विस्ट और टर्न देखने को मिलते हैं।
इन्हें फ़िल्म में देखकर आप अपनी आंखें नम होने से नहीं रोक पाएंगे। कैसे नोना, जूलियन को अपनी ज़िंदगी के बारे में बताकर उसे जीने के लिए प्रेरित करती हैं, यह सब जानने के लिए आपको यह फ़िल्म देखनी होगी, जो फिलहाल आपके नज़दीकी सिनेमाघरों में उपलब्ध है।
टेक्निकल एस्पेक्ट
फ़िल्म की प्रोडक्शन क्वालिटी बहुत उच्च है, जिसे देखकर आपको वास्तविक द्वितीय विश्व युद्ध जैसी स्थिति का अनुभव होता है। अगर बात करें फ़िल्म की सिनेमैटोग्राफी की, तो यह भी शानदार है। इसकी जितनी तारीफ़ की जाए, उतनी कम है।
खामियां
फ़िल्म की लंबाई थोड़ी ज़्यादा है, जिसे एडिटिंग के दौरान थोड़ा कम किया जा सकता था। यह मूवी फिलहाल सिर्फ़ अंग्रेज़ी भाषा में ही उपलब्ध है, जिसे हिंदी में डब नहीं किया गया है, जो इसके बॉक्स ऑफ़िस कलेक्शन के लिए एक नुकसान साबित हो सकता है।
फ़ाइनल वर्डिक्ट
अगर आप एक यूनिक कॉन्सेप्ट पर बनी द्वितीय विश्व युद्ध की स्थिति में डाली गई एक बेहतरीन इमोशनल फ़िल्म देखना चाहते हैं, तो आप इस फ़िल्म को बिल्कुल भी मिस न करें। फ़िल्म की कहानी आपको एक अलग दुनिया में ले जाती है, जहां हिटलर द्वारा यहूदी समुदाय पर किए गए अत्याचार को बहुत ही इमोशनल तरीके से हमारे सामने प्रस्तुत किया गया है। फ़िल्म की कहानी पूरी तरह से साफ़ और स्पष्ट है, जिसे आप अपनी पूरी फ़ैमिली के साथ देख सकते हैं। फ़िल्म के अंत तक यह आपको बांधकर रखती है, और इसका क्लाइमेक्स आते-आते आप गूज़बंप्स महसूस करते हैं। कुल मिलाकर ‘व्हाइट बर्ड’ एक मास्टरपीस है, जिसे आप बिल्कुल भी मिस न करें।
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