पंजाबी समुदाय में जब भी डाकू बग्गा का नाम लिया जाता है, तो सुच्चा सिंह का नाम भी याद आ जाता है। यह एक ऐसा नाम है, जो आपने अक्सर फिल्मों और कहानियों में सुना होगा, लेकिन असल में सुच्चा सिंह सूरमा की कहानी कुछ और है। सुच्चा सिंह को मानने वाले लोग उन्हें सुच्चा बाबा या बाबा जी भी कहते हैं, क्योंकि भले ही सुच्चा सिंह ने हत्याएँ कीं, लेकिन वे हत्याएँ उन्होंने समाज की भलाई के लिए की थीं।
पंजाब के मानसा गाँव में सुच्चा सिंह की समाधि परिसर में उनकी एक मूर्ति देखने को मिलती है। इस मूर्ति के एक हाथ में किताब और दूसरे हाथ में टँगा एक बैग है, जिसमें चादर रखी है, जिसका गहरा कनेक्शन सुच्चा सिंह के जीवन से है।
असल में सुच्चा सिंह वह व्यक्ति था, जिसने अपनी भाभी की बेरहमी से हत्या की थी। तो आखिर क्यों एक सज्जन पुरुष हत्यारा बनने को मजबूर हो गया? आइए जानते हैं।
कहाँ रहता था सुच्चा सिंह?
भटिंडा के एक गाँव में रहने वाला सुच्चा सिंह अपने भाई के लिए एक अच्छा रिश्ता तलाश रहा था। उसी समय बलबीर कौर, जो एक बहुत ही खूबसूरत विधवा थी, के लिए भी रिश्ता ढूँढा जा रहा था। पंजाबी समुदाय में विधवा की शादी की अनुमति थी।
बलबीर कौर के बारे में कहा जाता है कि उसका पहला पति उसे खुश नहीं रख पाता था। उसकी आर्थिक और शारीरिक ज़रूरतें पूरी नहीं होती थीं, जिसके कारण बलबीर कौर ने अपने पति को जहर देकर मार डाला था। इसके बाद उसके माता-पिता उसके लिए नया रिश्ता तलाश रहे थे।
क्यों की एक विधवा से अपने भाई की शादी सुच्चा सिंह ने?
उस समय की सच्चाई के अनुसार, सुच्चा सिंह का बड़ा भाई नारायण नशे का आदी था। दोनों को कोई अच्छा रिश्ता नहीं मिल रहा था, इसलिए बलबीर कौर और नारायण की शादी दोनों परिवारों की सहमति से करवा दी गई।
कैसे शुरू हुआ बलबीर और घुककर का चक्कर?
शादी के बाद घुककर सिंह, जो एक अमीर जमींदार और सुच्चा सिंह का सबसे अच्छा दोस्त था, का सुच्चा के घर आना-जाना लगा रहता था। इसी बीच बलबीर कौर, जिसे लोग बीरो भी कहते थे और जो पहले से ही चरित्रहीन थी, का घुककर सिंह के साथ अफेयर शुरू हो गया। उनके रिश्ते में नज़दीकियाँ इतनी बढ़ गईं कि दोनों शारीरिक रूप से भी एक हो गए।
कैसे बना सुच्चा सिंह, सुच्चा सिंह से सूरमा?
जब यह बात समाज और बिरादरी में फैलने लगी, तो परिवार की इज़्ज़त बचाने के लिए सुच्चा सिंह ने घुककर सिंह और अपनी भाभी बलबीर कौर दोनों को मार डाला। उसने कई बार उन्हें सुधरने की चेतावनी दी थी, लेकिन जब वे नहीं माने, तो सुच्चा सिंह को हत्यारा बनना पड़ा।
एक और बलबीरो से छुटकारा दिलाया था सुच्चा सिंह ने
सुच्चा सिंह के भाई की तरह ही एक और परिवार भी एक औरत के गलत चरित्र के कारण परेशानी में था। उनके पड़ोसी गाँव की एक विधवा, साहिब कौर, किसी अन्य पुरुष के साथ गलत रिश्ते में थी।
उसके दो बेटे थे, जिनमें से एक समझदार था और अपनी माँ को यह सब करने से मना करता था। लेकिन साहिब कौर ने अपने प्रेमी से अपने बेटे को पिटवा दिया। इसके बाद बेटे ने अपने मामा को पूरी बात बताई, और मामा ने सुच्चा सिंह को सारी कहानी सुनाई। सुच्चा सिंह को अपनी भाभी की कहानी याद आई और गुस्से में आकर उसने साहिब कौर को भी मार डाला। इस तरह सुच्चा सिंह को एक और हत्या करनी पड़ी।
इसके बाद सुच्चा सिंह को अपने गुनाहों की सजा भुगतने के लिए जेल जाना पड़ा। यही थी सुच्चा सिंह के सूरमा बनने की कहानी।
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