Steve Movie Review: सिलियन मर्फी की चिलिंग परफॉर्मेंस, जाने कैसी है फिल्म स्टीव।

Written by: Amir khan
Publish On: October 25, 2025 11:45 AM (IST)
STEVE NETFLIX MOVIE REVIEW IN HIDNI

विश्व भर में काफी नाम कमाने वाली फिल्म ‘ओप्पेन्हेइमेर’ में नजर आए कलाकार ‘सिलियन मर्फी’ लौट आए हैं फिर से, अपनी नई फिल्म “स्टीव” (Steve) के साथ। इस फिल्म को वैसे तो कुछ गिने चुने सिनेमाघरों में 19 सितंबर 2025 के दिन रिलीज किया गया था, लेकिन अब थोड़े लंबे अंतराल के बाद इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर 3 अक्टूबर 2025 के दिन रिलीज कर दिया गया है।

इसका डायरेक्शन ‘टिम मिलेंट्स’ ने किया है, जो कि इससे पहले साल 2019 में ‘पैट्रिक’ और 2024 में ‘स्मॉल थिंग्स लाइक दिस’ जैसी फिल्में डायरेक्ट कर चुके हैं। स्टीव मूवी की लंबाई की बात करें तो यह 1 घंटा 34 मिनट की है। चलिए जानते हैं क्या है इसकी कहानी और करते हैं स्टीव फिल्म का रिव्यू।

स्टोरी:

फिल्म की कहानी शुरू होती है एक सुधार ग्रह (स्कूल) से जहां पर उन बच्चों को रखा जाता है जिन्हें दुनिया नॉर्मल नहीं समझती, यहां नॉर्मल से मेरा मतलब है कि वह बच्चे जिन्हें हाय टेंपर रहता है, यानी बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है, या ऐसी कई परेशानियों से जूझ रहे बच्चों को इस सुधार गृह में रखा जाता है।

यहां के मुखिया का नाम स्टीवन (सिलियन मर्फी) है, साथ ही इसमें कई अन्य टीचर्स भी मौजूद हैं या फिर यूं कहें कि ये ठीक वैसा ही है जैसा स्कूल या फिर हॉस्टल होता है, इसके कुछ मुख्य टीचर्स की बात करें तो इनमें शोला (लिटिल सिम्ज़),जेनी (लिल सिम्ज़) है।

STEVEN AND HER STUDENTS
IMAGE CREDIT: IMDB

हालांकि फिल्म की कहानी मुख्य रूप से इस सुधार गृह में मौजूद दो स्टूडेंट्स के इर्द-गिर्द ज्यादा घूमती है जिनके नाम शाय (जे लाइकुर्गो) और बेनी (अरालोयिन ओशुनरेमी) हैं। क्योंकि इन दोनों की आपस में बिल्कुल भी नहीं बनती है। जिसका मुख्य कारण यह है कि बेनी गे है,

और यही कारण है कि कई बार इस सुधार ग्रह में मौजूद अन्य बच्चों से बेनी की लड़ाई होती हुई दिखाई दे जाती है। यहां पर मौजूद अन्य छात्रों की भी अपनी-अपनी परेशानियां हैं साथ ही साथ स्टीवन के इस स्कूल का अस्तित्व भी खतरे में पड़ा हुआ है क्योंकि इसे चलाने के लिए स्टीवन के पास (पैसा) खत्म हो चूका है और अगर आगे इसी तरह से चलता रहा तो इस स्कूल को बंद करना पड़ जाएगा,

लेकिन इसी बीच टेंशन का माहौल तब और भी ज्यादा क्रिएट हो जाता है जब कहानी में एंट्री होती है एक ऐसे ग्रुप की जो इन सभी बच्चों पर डॉक्यूमेंट्री बनाना चाहता है, जिसके लिए वह इन सभी के साथ समय बिताते हैं और यहीं इस फिल्म की कहानी को एक नया मोड़ मिलता है जिसे जानने के लिए आपको देखनी होगी स्टीव।

कुल मिलाकर यह डेढ़ घंटे की शॉर्ट फिल्म जिंदगी की कठिन उथल-पुथल से भरी हुई कहानी को स्क्रीन पर पेश करने की कोशिश करती है।

किस तरह के दर्शकों के लिए है ये फिल्म:

अगर आपने इससे पहले डॉक्यूमेंट्री फिल्में या फिर ड्रामा कहानियों पर बनी फिल्में देखी और आप इस तरह की स्टोरी को देखना पसंद करते हैं तब नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई ये स्टीव मूवी आपको खासा पसंद आएगी। लेकिन अगर आप उस तरह की ऑडियंस है जिन्हें किसी फिल्म को देखते समय उसकी कहानी में सस्पेंस थ्रिलर और ड्रामा की तिकड़ी को एक साथ देखने में मज़ा आता है तब शायद स्टीव आपको थोड़ा निराश कर सकती है।

कैसा है फिल्म का डायरेक्शन:

काफी लंबे समय से टिम मिलेंट्स फिल्मी डायरेक्शन के क्षेत्र में मौजूद हैं उनकी पिछली फिल्मों की बात करें तो 2023 में आई “विल” नाम की फिल्म ने मुझे पर्सनली बहुत आकर्षित किया था।
हां भले ही “स्टीव” टीम के द्वारा बनाई गई पिछली फिल्मों के जॉनर से हटकर देखने को मिलती है, पर फिर भी यह अपनी जगह परफेक्ट है।

क्योंकि जिस तरह से इस ड्रैमेटिक फिल्म को बनाया जाना चाहिए था ठीक उसी तरह से यह देखने को मिलती है। जैसे की फिल्म में मौजूद वह सीन जबशाय और बेनी एक सीन में बुरी तरह आपस में झगड़ा कर रहे होते हैं, क्योंकि बेनी ने शाय को सेक्शुअल हैरेस करने की कोशिश की थी और इसी दौरान इन दोनों के टीचर स्टीवन आकर इस मामले को शांत करने की कोशिश करते हैं और इस सीन में डायरेक्ट टिम मिलेंट्स का खूबसूरत निर्देशन झलकता है, जैसे मानो बेनी और शाय, स्टीवन के असली बेटे हों।

फिल्म के कमजोर पक्ष:

स्टीव भले ही डॉक्यूमेंट्री फिल्म नहीं है पर फिर भी यह देखने में कुछ हद तक किसी डॉक्यूमेंट्री जैसी लगती है जिससे कई बार दर्शक इस बीच में छोड़कर ही चले जाएंगे क्योंकि फिल्म के बायो में कहीं नहीं लिखा गया कि ये डॉक्युमेंट्री जैसी है।

मूवी में कई बार कुछ अटपटे सीन भी देखने को मिलते हैं जैसे की जब इस स्टीवन इस बात से परेशान होता है कि इस स्कूल को चलाने के लिए पैसे खत्म हो रहे हैं तभी बीच में “शोला” आ जाती है जो कि इसी स्कूल की एक टीचर है, इन दोनों के बीच डिस्कशन का या सीन काफी उबाऊ लगता है।

पॉजिटिव पॉइंट्स:

मूवी की लंबाई काफी कम है जिस कारण इसे फटाफट देखकर खत्म किया जा सकता है साथ ही इसे इंग्लिश और हिंदी दोनों ही भाषाओं में रिलीज किया गया है जिससे इसे भारत के हिंदी दर्शकों के बीच काफी ज्यादा पहुंच हासिल हो सकेगी.

डॉक्यूमेंट्री और ड्रामा फिल्में देखने वाले दर्शकों के लिए स्टीव एक परफेक्ट वॉच हो सकती है, इसमें समाज के कुछ गहरे और छुपे हुए चेहरों को भी दिखाया गया है।

निष्कर्ष:

इस फिल्म की सिनेमैटोग्राफी हो या फिर कलर ग्रेडिंग हर एक चीज लाजवाब है हां कहानी थोड़ी प्रिडिक्टेबल जरूर है लेकिन यह अंत तक आपको बांधे रखती है, फिल्म का डायरेक्शन लाजवाब है और लंबाई काफी कम, जो कब शुरू और कब खत्म हो जाती है आपको पता ही नहीं चलता, आप अगर आपको कुछ अलग तरह की स्टोरी देखना पसंद है तब इस फिल्म को एक बार जरूर देख सकते हैं।

मेरी तरफ से इस फिल्म के लिए रेटिंग रहेगी 3/5

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