कान्स फिल्म फेस्टिवल की अवॉर्ड विनिंग फिल्म ऑल वी इमेजिन ऐज लाइट, 3 जनवरी 2025 को जियोहॉटस्टार के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दी गई है। पायल कपाड़िया द्वारा लिखित और निर्देशित इस फिल्म ने कई नए रिकॉर्ड बनाए हैं और पिछले बने हुए कई रिकॉर्ड तोड़े भी हैं।
फिल्म की इनिशियल रिलीज 23 मई 2024 को कान्स फिल्म फेस्टिवल में की गई थी, उसके बाद 21 सितंबर 2024 को यह फिल्म भारत में थिएटर में रिलीज की गई और 2 अक्टूबर 2024 को फ्रांस में यह फिल्म रिलीज हुई थी। फिल्म को अच्छे कॉन्सेप्ट के लिए सराहना के साथ-साथ कई तरह से क्रिटिसाइज भी किया जा रहा है। फिल्म के एक्टर्स इसमें जान फूँकने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन क्रिटिक्स को अपना काम करने का मौका मिल ही जाता है।
फिल्म के कलाकार
साल 2024 में पूरे साल में 1476 फिल्में रिलीज हुई हैं, जिन्होंने बॉलीवुड को एक अच्छा योगदान दिया है। उनमें से एक है ऑल वी इमेजिन ऐज लाइट। फिल्म की निर्माता पायल कपाड़िया, जो फिल्म की कहानी की लेखिका भी हैं, समाज के लिए अपने नजरिए को फिल्म के मुख्य कलाकारों के जरिए दिखाती हैं।
इस अवॉर्ड विनिंग फिल्म के मुख्य कलाकारों के रूप में आपको फिल्म इंडस्ट्री के बेहतरीन कलाकार जैसे कि कानी कुसरुति, दिव्या प्रभा, छाया कदम, हृदु हारून, अजीज नेदुंगादी आदि की एक्टिंग देखने को मिलेगी। पायल कपाड़िया का सपना और कलाकारों की कड़ी मेहनत ने इस मास्टरपीस को बनाने में बड़ी कामयाबी हासिल की है।
फिल्म की कहानी
बात करें अगर इस फिल्म की कहानी की, तो इसमें आपको स्ट्रगल करती हुई दो नर्सों की कहानी मुख्य रूप से देखने को मिलेगी, जो मुंबई में आकर जीवन यापन के लिए मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करती हुई दिखाई गई हैं।
फिल्म की कहानी का मुख्य उद्देश्य दर्शकों को यह दिखाना है कि मुंबई, जिसे लोग सपनों की नगरी कहते हैं, दिखने और सुनने में जितना खूबसूरत यह शहर लगता है, वहाँ जीवन यापन करना कितना मुश्किल है।
प्रभा (कानी कुसरुति), जो एक नर्स है और अपने पति से अलग होकर रह रही है, इसके साथ एक और अनु नाम की रूममेट है और वह भी प्रोफेशन से नर्स है। अनु थोड़े से रंगीन मिजाज की लड़की दिखाई गई है, जिसकी अंतरंग गतिविधियाँ प्रभा को बार-बार उसके पति की याद दिलाती हैं।
फिल्म के प्लस पॉइंट
वैसे तो यह एक बेहतरीन फिल्म है और यही वजह है कि फिल्म को कान्स फिल्म फेस्टिवल में ग्रैंड प्रिक्स अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इससे पहले 1994 में कान्स फिल्म फेस्टिवल में स्वाहम नाम की भारतीय फिल्म शामिल हुई थी। पूरे 30 साल बाद अब पायल कपाड़िया की इस फिल्म को यह मौका मिला है।
फिल्म समाज की सच्ची तस्वीर को दर्शकों के सामने रखती है। भले ही बहुत से लोग फिल्म को क्रिटिसाइज कर रहे हों, लेकिन यह एक बेहतरीन फिल्म है, एक-दो कमियों के साथ।
फिल्म के माइनस पॉइंट
समाज की सच्ची सोच और परिदृश्य को दिखाती हुई यह फिल्म कहीं न कहीं मुंबई शहर में रहने वाले लोगों की नकारात्मकता को दिखाती है। यह हकीकत है कि भारत गरीबी वाला देश है, लेकिन जिस तरह से नर्स का प्रोफेशन करने वाली महिलाओं की आर्थिक स्थिति को फिल्म में दिखाया गया है, वह कहीं न कहीं सोचनीय है।
फिल्म में जो कुछ भी दिखाया गया है, वह एक हकीकत है, लेकिन कुछ ज्यादा ही गहराई और सच्चाई के साथ प्रस्तुत किया गया है, जो खुद एक नकारात्मक पॉइंट बन जाता है। इसके अलावा, साथ में एडल्ट कंटेंट को जोड़ना भी थोड़ा सा अनुपयुक्त लगता है।
निष्कर्ष
पायल कपाड़िया की यह फिल्म एक बेहतरीन फिल्म है, जिसमें आपको एक शानदार कॉन्सेप्ट, बेहतर एक्टर्स के साथ दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन उसके साथ ही आपको फिल्म में थोड़ी सी नीरसता और स्लो मोशन देखने को मिलेगा।
अगर आपको भारत की सच्चाई को देखना है, तो आप इस फिल्म को देख सकते हैं, जिसे जियोहॉटस्टार के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया गया है। इस फिल्म को फिल्मीड्रिप की तरफ से 5 में से 3 स्टार की रेटिंग दी जाती है।
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