Anees Bazmee: 1977 में भाई के लिए काम ढूंढ़ते हुए खुद के लिए मिला रोल,फिल्मों में आना रहा इत्तेफाक एक्टिंग में नहीं था कोई इंटरेस्ट

Written by: Amir khan
Publish On: October 2, 2024 9:41 PM (IST)
Anees Bazmee Got a role for herself while looking for work for her brother in 1977

अनीस बज़मी फिल्म इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम जिसने काफी स्ट्रगल के बाद एक बहुत बड़ा नाम इस इंडस्ट्री में कमाया है। बॉलीवुड में बेहतरीन कॉमेडी फिल्मों के लिए सबसे पहले जिनका नाम आता है वो है अनीस बजमी जिन्होंने अपने जीवन में आर्थिक तंगी का सामना करते हुए जीवन के उतार चढ़ाओ से जूझते हुए जीवन जीने की कला को सीखा है और यही वजह है कि अनीस बजमी का फ़िल्में बनाने का मेन लक्ष्य लोगों को हसाना रहता है।

इस बात को खुद अनीस बज़मी ने अपने एक इंटरव्यू में जो सिद्धार्थ कन्नन के पॉडकास्ट में लिया गया था अपने जीवन के कुछ ख़ास पलों को शेयर करते हुए बताया है कि जब किसी भी इंसान के जीवन में बहुत जादा परेशानिया आती है तो वो आटोमेटिक हर परिस्थिति में हसना सीख जाता है और ये उनकी खुद की लाइफ का एक्सपीरियंस है।


आइये जानते है अनीस बजमी के जीवन के कुछ इंट्रेस्टिंग उतार चढ़ाओ वाले पलों के बारे में किस तरह स्ट्रगल करते हुए जीवन में कुछ करने का उद्देश्य लिए हुए फिल्मी क्षेत्र में बना लिया खुद का एक अलग मुकाम।

अनीस बज़मी नहीं चाहते थे फिल्मों में काम करना –

अनीस बजमी के जीवन से जुड़ा ये एक फैक्ट है कि अनीस बज़मी का फिल्मी दुनिया में आने का कोई सपना नहीं था कभी सोचा भी नहीं था कि फिल्मी दुनिया में उनका इतना बड़ा मुकाम इंतज़ार कर रहा है। अनीस बजमी ने अपने एक पॉडकास्ट में जो सिद्धार्थ कन्नन के द्वारा लिया गया उसमे हम सबके साथ ये बात शेयर की के उनके पिता एक शायर थे

जो शायरी में ही बिजी रहते थे और उनका सोर्स ऑफ इनकम कुछ खास नहीं था जिसकी वजह से थोड़ा बड़ा होने के बाद अनीस बजमी ने जीवन में कुछ न कुछ करने की ठानी और इसी सोच के साथ अनीस बजमी ने कोई काम ढूंढने की कोशिश शुरु कर दी।

भाई की खूबसूरती और कम उम्र बनी अनीस बज़मी की कामयाबी की वजह –

अपने जीवन में कुछ न कुछ करने के उद्देश्य से अनीस बज़मी ने भाई की खूबसूरती को देखते हुए उनके लिए सिनेमा जगत में काम ढूंढने की सोची और अपने भाई का फोटो लिए हुए कुछ प्रोडूसर्स के पास गए लेकिन भाई की ऐज कम बताते हुए उन्ही के लिए एक रोल ऑफर कर दिया गया जिसको अनीस बज़मी ने एक्सेप्ट कर लिया और अपने करियर की पहली फिल्म की जिसमें इनका एक अहम रोल था और इस तरह अनीस बजमी के करियर की पहली फिल्म बनी जिसमें उनकी एक्टिंग दर्शकों को देखने को मिली।


इस तरह भाई के लिए काम ढूंढने निकले अनीस बजमी को खुद अपने लिए काम मिल गया और जिस क्षेत्र में जाने के लिए अनीस ने कभी सोचा नहीं था उस क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत कर दी थी अनीस बजमी ने जो इस बात से बिलकुल अनजान थे कि एक दिन इसी क्षेत्र में उन्हें बड़ी कामयाबी मिलने वाली है एक डायरेक्टर एक स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर।

अनीस बजमी ने आखिर क्यों बदले 32 घर?

सिद्धार्थ कन्नन के एक पॉडकास्ट में अनीस बजमी की जिंदगी का एक बहुत रहस्यपूर्ण सवाल का जवाब फैन्स को मिला और वो सवाल था उनका अपने जीवन में 32 घर बदलने का सवाल जिस बहुत ही सीरियस सवाल का जवाब अनीस बजमी ने मुस्कुराते हुए दिया और वो था के अगर आप किराये के मकान में रहते है और आप के ऊपर 11 महीने से ज्यादा का किराया चढ़ गया है तो आपके पास एक ही ऑप्शन होता है के घर बदल कर अपने बजट के हिसाब से किराये वाले घर को चूज़ करना और अनीस बजमी फिल्म इंडस्ट्री के वो कामयाब हस्ती है जिन्होंने अपने जीवन में बहुत स्ट्रगल किया है यहां तक कि पैसे न होने की वजह से 32 किराये के घर बदले है किराया न अदा करने की वजह से।

अनीस बजमी ने मुश्किल हालातों को बताया अपनी कामयाबी के लिए प्लस पॉइंट –

अनीस बजमी ने अपने इंटरव्यू में बताया कि अपने मुश्किल हालातों को हमेशा उन्होंने मुस्कुराकर ही गुज़ारा है कभी भी किसी मुश्किल के वक्त अपने विश्वास को टूटने नहीं दिया और इस बात पर हमेशा भरोसा रहा कि भगवान जो भी करता है वो अच्छा ही करता है। अनीस बजमी ने बताया कि जब कोई भी इंसान बहुत सारी परेशानियों से एक साथ गुज़रता है तो वो परेशानिया ही उसकी एनर्जी बन जाती है और यही एनर्जी उन्हें भी मिली है। अनीस बजमी का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में इतनी जादा मुश्किलों का सामना किया है कि उनके जीवन का अब एक ही उद्देश्य है कि लोगों को जितना ज्यादा हो सके इंटरटेन कर सकें और हसा सकें ताकि लोग अपने जीवन के स्ट्रेस और परेशानियों को भूल सकें।

अनीस बजमी ने बताया कि उन्होंने हमेशा अपने जीवन के हर मुश्किल वक्त का सामना मुस्कुराते हुए किया है और इन्ही मुश्किल हालातों ने उन्हें जीवन में कुछ कर दिखाने के लिए प्रेरित किया है।

पिता से सीखी लिखने कि कला –

अनीस बजमी ने अपने इंटरव्यू में बताया कि अपने पिता से उन्होंने लिखने कि कला सीखी है आज वो जो कुछ भी थोड़ा बहुत कहानियों को लिखने का हुनर रखते है वो उनको अपने पिता से मिला है।


अनीस बजमी के पिता एक लेखक थे जो कुछ न कुछ लिखा करते थे एक तरह कि शेरो शायरी में उनका जादा तर समय दोस्तों के साथ ही बीतता था और उस समय अनीस बहुत छोटे थे तो शायरों के बीच इनका ज़ादातर बचपन बीतने की वजह से इनका थोड़ा बहुत इंटरेस्ट लिखने में रहा और आज एक महान हस्ती एज अ स्क्रीनराइटर और डायरेक्टर गिने जाते है।

अनीस बजमी के करियर की शुरुआत –

अनीस बजमी अपनी जिंदगी में बड़ी बड़ी समस्याओं से जूझ रहे थे ऐसे में उनके लिए काम करना बहुत ज़रूरी था और फिल्मी दुनिया में इंट्रेस्ट न होते हुए भी काम मिलने पर अनीस ने अपनी पहली फिल्म मात्र 12 साल की उम्र में किताब 1977 में की और उसके बाद 1995 में पहली फिल्म एक निर्देशक की तरह की जिसका नाम हलचल था और एक पटकथा लेखक के रूप में 1990 की फिल्म स्वर्ग की कहानी को लिखा था। इस प्रकार न चाहते हुए भी काम को प्रार्थमिकता देते हुए अनीस बजमी ने अपने करियर को फिल्मी दुनिया में ही कामयाबी तक पहुंचाया।


इसके अलावा नो एंट्री,मुझसे शादी करोगी, कही प्यार न हों जाये,राजू चाचा, अंदाज़,दीवाना मस्ताना, राजा बाबू,सिर्फ तुम, शोला और शबनम,पुलिस वाला,अपराधी, मुकाबला, भयानक,अंग रक्षक,भयानक, किंग अंकल,आर्मी, वेलकम,भूलभूलेय्या,सनम, नसीब आदि फ़िल्में की।

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  • amir khan

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