आसिफ अकबर के द्वारा निर्देशित अमेरिकन क्राइम थ्रिलर “बोनयार्ड” की कहानी 2009 में घटित एक सच्ची घटना पर आधारित है। ये घटना अल्बुकर्क, न्यू मैक्सिको के वेस्ट मेसा के रेगिस्तान की है, जहां 11 औरतों और एक नवजात बच्चे के शव जमीन में दफन पाए गए थे। ये एक सीरियल किलर का काम था। इस घटना में सेक्स ट्रैफिकिंग को भी शामिल माना गया था।
सीरियल किलर के प्रकार
सबसे पहले जानते हैं सीरियल किलर के प्रकार, जो ये फिल्म हमें बताती है।
चार तरह के सीरियल किलर होते हैं:
बेवकूफ सीरियल किलर
ये सीरियल किलर बेवकूफ होते हैं। ये दूसरों की बातों में जल्दी आ जाते हैं। कोई इनसे कहता है कि जाओ इसको मार दो, तब ये किसी को भी आसानी से मार सकते हैं।
ताकत पर भरोसा करने वाले सीरियल किलर
ये सीरियल किलर अपनी ताकत पर हद से ज्यादा भरोसा करते हैं। लोगों को तड़पा-तड़पा कर मारने में इनको मजा आता है। ये अपने आप को भगवान समझते हैं। इनको लगता है कि ये किसी से नहीं डरते और जिसे चाहें, उसे आसानी से मौत के घाट उतार सकते हैं।
हेडोनिस्टिक (सुखवादी) सीरियल किलर
इस तरह के लोग जिंदगी में बहुत ज्यादा सुख लेना चाहते हैं और इस सुख को पाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। सुख चाहे जैसा भी हो। कुछ मामलों में देखा गया है कि ये सीरियल किलर सेक्स के भूखे होते हैं। फिर वो औरत जिंदा हो या मरी, इससे इनको कोई मतलब नहीं रहता। कई मामलों में तो ये भी देखा गया है कि ये सीरियल किलर बच्चों को भी नहीं छोड़ते। सेक्स के बाद उन्हें मारने में इनको मजा आता है।
साइको सीरियल किलर
ये दिमागी रूप से पागल होते हैं। ये इस तरह की हरकत करते हैं, जो आम सीरियल किलर नहीं कर सकता, जैसे कि इंसानी मांस खाना, लोगों का खून पीना। कुछ इस तरह हमने हाल ही में नोएडा के निठारी हत्याकांड में देखा था, जो बच्चों का मांस खाता था।
पर फिल्म में दिखाया जाने वाला किलर एक ‘मिशन ओरिएंटेड’ (लक्ष्य) के तहत काम करने वाला किलर है, जिनको लगता है कि वो लोगों को मारकर दुनिया को अच्छा बना सकते हैं। कहानी एक डिटेक्टिव की भी दिखाई जाती है, जो इस केस की जांच कर रहा है और एक हादसे में अपनी बेटी को खो देता है।
अब क्या ये डिटेक्टिव किलर का पता लगाता है या नहीं, ये सब जानने के लिए आपको ये फिल्म देखनी होगी।
पॉजिटिव पॉइंट
अगर आप सस्पेंस थ्रिलर फिल्म देखना पसंद करते हैं और साथ ही आपको ये भी पता लगे कि जो हम फिल्म में देख रहे हैं, वो सब सच में हुआ है, तो ये फिल्म आपके लिए देखना और भी जरूरी हो जाती है। आज तक ये सीरियल किलर पकड़ा नहीं गया है।
एक पुलिसवाला, एक जासूस, साथ ही एफबीआई, सभी मिलकर इसकी तलाश में लगे हैं। पूरी फिल्म ट्विस्ट और टर्न से भरी हुई है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी अच्छे ढंग से की गई है। स्क्रीनप्ले टाइट है, जो पूरी फिल्म में आपको बांधे रखता है।
निष्कर्ष
अगर आप जानना चाहते हैं कि 2009 के इस सीरियल किलर केस में क्या-क्या हुआ था, 11 औरतों और एक नवजात बच्चे को किसने मारकर दफन कर दिया था, तो आपको ये फिल्म प्राइम वीडियो पर हिंदी, तमिल, तेलुगु, बंगाली, इंग्लिश भाषा में देखने को मिल जाएगी।
हमारी तरफ से इस फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार दिए जाते हैं।
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