1988 में आई फिल्म ‘डाई हार्ड’ जिसने फिल्मी जगत में अपना एक अलग मुकाम हासिल किया था और इसी फिल्म से हॉलीवुड के बेहतरीन कलाकार ‘जॉन मैकलेन’ को एक अलग पहचान भी मिली थी। ठीक उसी तरह की झलक इस शुक्रवार 21 फरवरी को आई हॉलीवुड फिल्म “क्लीनर” में भी देखने को मिलती है ।
मात्र 1 घंटा 36 मिनट की फिल्म क्लीनर रोमांच का एक ऐसा हैवी डोज देकर जाती है। जिसे दर्शकों द्वारा भुलाया ना जा सके। जिसका डायरेक्शन ‘मार्टिन कैम्पबेल’ ने किया है, जो इससे पहले साल 2011 में आई फिल्म ‘ग्रीन लांटर्न’ का भी डायरेक्शन कर चुके हैं।
मूवी के मुख्य किरदारों में ‘डेज़ी रिडले’ क्लाइव ओवेन,रे फ़ियरन जैसे अनुभवी कलाकार देखने को मिलते हैं। क्लीनर की कहानी मुख्य रूप से सेना की एक्स जवान जिसका रोल ‘डेज़ी रिडली’ ने निभाया है उन्हीं पर आधारित है।
कास्ट:
- डेज़ी रिडले,क्लाइव ओवेन,रूथ गेमेल।
- डायरेक्टर: मार्टिन कैम्पबेल।
- स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म: सिनेमाघर।
कहानी:
फिल्म की कहानी मुख्य रूप से ‘लंदन’ में रहने वाली ‘जॉय’ नाम की लड़की पर आधारित है। जो अपने बीते समय में सेना का हिस्सा रह चुकी है और वर्तमान में, स्काईस्क्रैपर्स यानी बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों के बाहरी सतह के शीशों को साफ करने का काम करती है जिस पर इस फिल्म का टाइटल ‘क्लीनर’ रखा गया है।
हालांकि अपने काम के दौरान जॉय कि अपने बॉस से बिल्कुल भी नहीं बनती। क्योंकि जॉय काफी लेट लतीफ टाइप की इंसान है। साथ ही इसका एक भाई भी है,जोकी एक गंभीर दिमागी (आर्टिसम) बीमारी से जूझ रहा है। पर साथ ही वह हैकिंग का मास्टर भी है।
और हैकिंग के इसी गंदे शौख के कारण उसे हर एक एसाइलम से निकाल दिया जाता है। इसी मजबूरी के चलते जॉय अपने भाई को अपने साथ काम पर ले जाती है। पर कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब इस बिल्डिंग में कुछ ऐसे लोगों की एंट्री होती है,जिन्हें इंसानी जाति को पूरी तरह से खत्म करना है और उनका मानना है

कि क्लाइमेट चेंज होने के कारण दुनिया जल्दी खत्म हो जाएगी,और इसके लिए सिर्फ इंसान जिम्मेदार हैं। इसी दौरान बिल्डिंग के अंदर भारी गोलाबारी शुरू हो जाती है और जॉय का भाई जो कि उसे बिल्डिंग के अंदर है और जॉय अपने काम पर।
अब कैसे होगा अपने भाई को इस मुश्किल सिचुएशन से सही सलामत इस बिल्डिंग से बाहर निकालती है, इसी पर फिल्म का प्लॉट बुना गया है , जिसे और अधिक जानने के लिए देखनी होगी फिल्म क्लीनर।
फिल्म की खामियां:
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसके मुख्य किरदार का फाइटिंग सीन करना है जिसे इसके मेकर्स द्वारा बिल्कुल भी जस्टिफाई नहीं किया गया। कि इतने लंबे समय के बाद जॉय कैसे अपनी ट्रेनिंग को नहीं भूली है।
इसकी दूसरी बड़ी कमी यही है,कि इस फिल्म को डाई हार्ड मूवी की कहानी से फ्रेम टू फ्रेम कॉपी किया गया है ,और यह कॉपी इतनी सस्ती है जिससे हमें बिल्कुल भी मजा नहीं आता।
आमतौर पर मूवी की लेंथ का छोटा होना एक अच्छा फैक्टर माना जाता है। पर तब क्या हो जब फिल्म में कहानी के नाम पर सिर्फ किसी दूसरी फिल्म को मात्र कॉपी कर दिया जाए।
“यह ठीक वैसा ही है जैसे हम किसी होटल में बिरियानी ऑर्डर करें और उस बिरयानी का टेस्ट खिचड़ी जैसा हो,,
पॉजिटिव पॉइंट्स:
भले ही यह फिल्म डाई हार्ड की सस्ती कॉपी हो पर फिर भी यह उसकी एक ठीक-ठाक सी झलक दिखाती है। जिसे थोड़ा मॉडिफाई करके 2025 की टाइमलाइन के हिसाब से सेट किया गया है।
फाइनल वर्डिक्ट:
अगर इस फिल्म को थिएटर के बजाय सीधे ओटीटी पर रिलीज किया जाता, तो यह एक बेहतर ऑप्शन के रूप में देखी जा सकती थी। क्योंकि किसी फिल्म को सिनेमाघरों और ओटीटी पर देखने वाली ऑडियंस में काफी अंतर होता है।
पर फिर भी अगर आप इस वीकेंड एक नई फिल्म देखने का प्लान बना रहे हैं। तब क्लीनर मूवी को रिकमेंड कर सकते हैं जो की काफी शॉर्ट लेंथ की है,जिससे आपका बहुत ही कम टाइम खर्च होगा। हालांकि इससे आप ज्यादा उम्मीदें नहीं लगा सकते क्योंकि यह काफी एवरेज क्वालिटी के अंतर्गत आती है।
फिल्मीड्रिप रेटिंग: 5/2 ⭐ ⭐.
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