अश्वथ मारिमुथु के निर्देशन में बनी फिल्म ड्रैगन को तमिल भाषा में सिनेमा घरो में रिलीज़ कर दिया गया है। यह एक कॉमेडी ड्रामा फिल्म है जिसमे हमें प्रदीप रंगनाथन,अनुपमा परमेश्वरन,कयादु लोहार जैसे सितारे दिखाई दे रहे है।
क्या आपको 2022 में आयी तमिल रोमांटिक कॉमेडी ‘लव टुडे’ याद है। पांच करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 100 करोड़ का कलेक्शन कर के सिनेमा घर को हिला कर रख दिया था। लव टुडे का निर्देशन किया था प्रदीप रंगनाथन ने और यही इस फिल्म के मुख्य भूमिका में भी दिखाई दिए थे।
अब लोग ड्रैगन फिल्म के बारे में इस लिए बाते कर रहे है क्युकी इसके मेन लीड में भी हमें प्रदीप रंगनाथन नज़र आरहे है। प्रदीप दोबारा से एक और दिलचस्प कहानी लेकर आये है।
कहानी
फिल्म की कहानी में रागवन “ड्रैगन” (प्रदीप रंगनाथन) एक इंटरमीडिएट का छात्र है। रागवन एक ईमानदार लड़का है। उसे कीर्ति (अनुपमा परमेश्वरन) से प्यार हो जाता है और वह अपने प्यार का इज़हार कीर्ति से करता है, पर कीर्ति रागवन से कहती है कि उसे बुरे लड़के पसंद आते हैं, न कि पढ़ने-लिखने वाले लड़के। वह उन लड़कों की बात करती है जो कॉलेज में पूरे स्वैग के साथ घूमते हैं और जिन पर हर लड़की जान छिड़कती है।
जब रागवन को सिर्फ इस बात के लिए ठुकरा दिया जाता है के वो एक पड़ने लिखने वाला स्कूल का टॉपर सीधा साधा शरीफ लड़का है। तब यह रागवन से ड्रैगन बन जाता है। ड्रैगन मतलब स्वैग से रहने वाला पढ़ाई लिखाई छोड़ कर मार धाड़ करने वाला लड़का । अब यह नया रूप देख कर ड्रैगन से कीर्ति को प्यार हो जाता है। पर ड्रैगन को इस बात का अंदाज़ा नहीं था के वह इन सबसे अपना करीयर खराब कर रहा है।

6 साल तक दोनों एक साथ रहने के बाद कीर्ति एक दिन रागवन से कहती है के मेरे लिए एक सक्सेस फुल लड़के का रिश्ता आया है। जो महीने का एक लाख कमाता है वह यह कह कर रागवन से रिश्ता तोड़ लेती है।
कहानी का लेखन अश्वथ मारिमुथु ने किया है जो की सकारात्मकता से भरा है। इन्होने अपनी पहली ‘ओह माई कदावुले’ के जैसा ही ड्रैगन का भी निर्देशन और लेखन में काम किया है।
यह एक लड़के की संघर्ष अहसास प्यार की कहानी है जिसे उतने ही प्यार से पेश भी किया गया है यहाँ मनोरंजन के साथ-साथ कुछ और भी है जो हमें कहानी में देखने को मिलता है।
ड्रैगन के अच्छे और बुरे पहलू
फिल्म का पहला हिस्सा पूरी तरह से रोमांटिक है जहा हमें अच्छे-अच्छे प्यार भरे रोमांटिक दृश्य देखने को मिलते,तो वही दूसरे हिस्से में कहानी अलग रास्ता पकड़ लेती है जहा से रागवन के भावात्मक सफर की शुरुवात होती है।
अंत के 20 मिनट को जिस तरह से दिखाया गया है उसे देख कर मै अपने आप पर से कंट्रोल खो देता हूँ और आँखों से आंसू को रोकने में असमर्थ पाता हूँ।
अश्वथ मारिमुथु ने अपने क्रिएटिव अंदाज में यहाँ ये दिखाया है कि कैसे एक अच्छे खासे लड़के की ज़िंदगी एक धोखे से बर्बाद हो सकती है, और सबसे अच्छी बात ये है के इसे इन्होने मनोरंजन के साथ सिनेमा पर उतारा है।
यहाँ ज़िंदगी को सीरियसली न लेने वाले युवापीढ़ी के लिए एक अच्छा सन्देश भी दिया गया है। ज़यादातर सीन असल ज़िंदगी से जुड़े होने की वजह से हमारे दिल के बहुत क़रीब आकर बैठ जाते है।
साथ ही, माँ-बाप का अपने बच्चों के साथ संबंध दिल को छू लेने वाला है। असफलता को भी सफलता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।यह रोमांस से शुरू होकर इमोशनल यात्रा है जिसे पार करने के बाद एक सुखद अनुभव का अहसास होता है।
कैरेक्टर परफॉर्मेंस
प्रदीप रंगनाथन ने खुद को समर्पित कर दिया है रागवन “ड्रैगन” के किरदार में हर एक फ्रेम में इन्होने खुद को इस तरह से दिखाया है जिसे देख कर ऐसा लगता है के हम इसकी ही तलाश कर रहे थे। ड्रैगन के कैरेक्टर में इनका परफॉर्मेंस इसे अगले स्तर पर लेकर जाता है।
अगर आप इसे मनोरंजन के तौर पर देखना चाहते है तो ड्रैगन प्रदीप रंगनाथन की वजह से मनोरंजन के चरम पर जाती दिखाई देती है ।
अनुपमा परमेश्वरन को फिल्म में बहुत ज़ादा टाइम नहीं दिया गया है जहा दूसरे हिस्से में ऐसा लगता है के अब अनुपमा परमेश्वरन की इंट्री नहीं होने वाली तो एक अच्छे टाइम पर दोबारा से अनुपमा परमेश्वरन के दर्शन होते है। कीर्ति की भूमिका शायद अनुपमा के करियर की बेस्ट परफॉर्मेंस होने वाली है।
म्यूज़िक
म्यूज़िक और बीजीएम दिया है ‘लियोन जेम्स’ ने और यहाँ पर बीजीएम सीन और कैरेक्टर के बीच कुछ इस तरह से भावत्मक सम्बन्ध बनाया गया है जो लोगो के दिलो को छूने में सफल रहता है।
क्लाइमेक्स के सीन को लियोन जेम्स अपने बीजीएम के माध्यम से पीक लेवल पर ले जाते है।बीजीएम के ज़रिये ही फिल्म के बहुत से पात्र को यादगार और असल दिखाने का अच्छा प्रयास किया गया है।
गानो ने काफी निराश किया है यहा वो फीलिंग देने में असमर्थ रहे है जितनी की इनसे उम्मीद थी।
सिनेमाटोग्राफी
फ्रेमिंग से लेकर लाइटिंग कलर ग्रेडिंग सब कुछ बढ़िया है।
प्रोडक्शन वैलु
प्रोडक्शन वैलु ठीक ठाक है जितना बजट है उस हिसाब से फिल्म देखने से पता लगती है।
एक्स्ट्रा
कलाइमेक्स में हमें एक कैमियो देखने को मिलता है उसे तो बिलकुल मिस नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
बहुत ज़ादा एक्सपेक्टेशन के साथ आप इसे नहीं देख सकते अगर आप इस वीकेंड भरपूर मनोरंजन करना चाहते है तब यहाँ आपके लिए एक परफेक्ट कहानी है। यह रोमांटिक फिल्म के साथ ही एक भावात्मक फिल्म भी है एक अच्छे सप्ताह की शुरुवात ड्रैगन को देख कर की जा सकती है। फ़िल्मी ड्रिप की ओर से इसे दिए जाते है पांच में से तीन स्टार।
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