Gaami Movie Hindi Review: हॉलीवुड को टक्कर,कुम्भ का मेला,हिमालय की जड़ी बूटी,इंसानी दिमाग के साथ एक्सपैरिमेंट जानिए ?

Written by: Amir khan
Publish On: September 26, 2025 11:44 AM (IST)
Gaami Movie Review hindi

8 मार्च 2024 को गामी नाम की तेलगु फिल्म सिनेमा घरो में रिलीज़ की गयी थी मात्र 15 करोड़ की क्राउड फंडिंग के साथ बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 22 करोड़ प्लस का कलेक्शन किया।

गामी का निर्देशन विद्याधर कागीता ने किया है। बहुत इंतज़ार करने के बाद अब गामी को हिंदी में डब्ड करके अमेज़न प्राइम पर रिलीज़ कर दिया गया आइये जानते है कैसी है यह फिल्म क्या ये फिल्म आपको संतुष्ट करेंगी।

अगर आपको इस्प्रिचुवल फिल्म देखने के शौक है और धर्म से जुड़े कुछ अनसुलझे तथ्य को जानने में रूचि है तब गामी में बहुत सी ऐसी चीज़े देखने को मिलेगी जिनको और अच्छे से समझने के लिए शायद आपको गूगल का सहारा लेना पड़े।

कहानी

कहानी के मेंन लीड में ‘विश्वक सेन’ देखने को मिलते है,जिन्हे हमने गैंग आफ गोदावरी में भी देखा था। यह फिल्म में शंकर की भूमिका में दिखाई पड़ रहे है। शंकर को अजीब सी बीमारी है शंकर जब किसी इंसान को छूता है तब इसका शरीर जलने लगता है लोगो का यह मानना है कि शंकर श्रापित व्यक्ति है जिसे महादेव भगवान के द्वारा यह श्राप मिला है।

शंकर अपनी सभी पिछली यादो को भुला चुका है और इसे अपने बारे में कुछ भी याद नहीं। शंकर के बारे में केदार बाबा को पता होता है के यह कौन है। पर केदार बाबा कुम्भ के मेले में गए हुए है शंकर उन्हें ढूढंते हुए कुम्भ के मेले की और प्रयागराज जाने के लिए निकल पड़ता है।

वहा बहुत ढूढ़ने के बाद उसे पता लगता है के केदार बाबा अब इस दुनिया से चले गए है पर उनका चेला वहा उपस्तिथ है और वह बोलता है के केदार बाबा ने तुम्हारे लिए एक नक्शा छोड़ा है जिसकी सहायता से तुम हिमालय पर जाकर अपनी बीमारी को दूर करने की जड़ी बूटी ढूंढ कर ला सकते हो।

यह मशरूम सिर्फ 34 साल बाद ही उगता है तब शंकर और एक जर्नलिस्ट हिमालय की कठिन यात्रा के लीये निकल पड़ते है।

कहानी की दूसरी तरफ एक पुरानी फक्ट्री में इलीगल एक्सपैरिमेंट होता हुआ दिखाया जा रहा है जहा कुछ लोग अनाथ इंसानो को पकड़ लाते है और इन पर निर्दयी तरह से एक्सपैरिमेंट कर रहे है।

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यहाँ कहानी सीटी-333 नाम के लड़के की दिखाई जाती है जो इस जेल नुमा जगह में ज़बरदस्ती बंदी बनाया गया है।लगभग दो सालो से सीटी-333 यहाँ बंद है और इसपर तरह तरह के एक्सपैरिमेंट किये जा रहे है। जो देखने में बहुत ब्रूटल है। अब यह ऐसा क्यू किया जा रहा है कौन सी खोज की जा रही है इंसानो को मार-मार कर यह सब इस फिल्म को देख कर ही पता लगाना होगा।

तीसरी एक अलग कहानी है जो चल रही है एक छोटे से गांव में यहाँ एक दुर्गा नाम की देवदासी है। इस गांव के मंदिर की देवदासियों के साथ शारीरिक शोषण किया जा रहा है। दुर्गा को भी एक अलग तरह की बीमारी है कहानी में जो सबसे बड़ा ट्विस्ट है वो यह है के दुर्गा,सीटी-333,शंकर यह तीनो आपस में कनेक्ट है। अब इनका आपस में ऐसा क्या कनेक्शन है वह देखना बहुत रोमांचकारी होने वाला है।

क्या है फिल्म में ख़ास

वैसे तो फिल्म की बहुत सी खासियत है पर सबसे पहले हम बात करते है इसके नकारात्मक तथ्यों पर जहा पर आप गामी के किसी भी कैरेक्टर से उस तरह से इमोशनली कनेक्ट नहीं हो पाते जैसा की होना चाहिए था।इसकी जो सबसे बड़ी वजह है वह यह के इसके स्क्रीन प्ले को सही ढंग से प्रस्तुत न किया जाना।

पर ऐसा नहीं है के आप इन तीनो कैरेक्टर से इमोशनली जुड़ नहीं पाते, जुड़ते है पर कहानी के अंत में। शुरवात में कहानी थोड़ी बोर करती है तब इसे देखने के लिए थोड़ा टाइम देना होगा।

बहुत टाइम के बाद हमें इंडियन सिनेमा में कुछ अलग हट कर एक अच्छी एक्सपेरीमेंटल कहानी देखने को मिली। गामी को देख कर लगता है के इसको बनाने के लिए बहुत रिसर्च की गयी होगी जिसके लिए काफी मेहनत टाइम और पैसा भी लगा होगा।

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सीटी-333 का जो कैरेक्टर है वह कही से भी नहीं लगता के एक काल्पनिक किरदार है इसने इतनी अच्छी एक्टिंग की है जैसा वह अपनी असल ज़िंदगी को परदे पर जी रहा हो,वही दुर्गा और शंकर का का प्रदर्शन भी शानदार है। पहले के दौर में देवदासी का जो कॉन्सेप्ट था यहाँ पर आपको उसे समझने में थोड़ी मदद मिलेगी।

इतने कम बजट में इस तरह की फिल्म बनाने के लिए मेकर को सलाम है। गामी को देखते वक़्त टोटल हॉलीवुड वाली फीलिंग आरही थी यही वजह है के इसे बनाने में 6 साल का वक़्त लगा कुम्भ का मेला अभी चल रहा है कुम्भ के मेले को फिल्म में बहुत अच्छे से दर्शाया गया है देख कर तो ऐसा ही लगता है जैसा की यह असल कुम्भ में ही शूट की गयी थी ।

निष्कर्ष

निर्देशक विद्याधर कागीता ने पहले इसे एक शार्ट फिल्म बनाने का फैसला लिया पर 45 मिनट में इतना सब कुछ दिखा पाना आसान नहीं था तब इसे एक फिल्म का रूप दिया गया जिन्हे सीरियस और कुछ नया समझने देखने और जानने का कीड़ा है।

उनके लिए यह वन आफ द बेस्ट फिल्म साबित हो सकती है हमारी टीम को यह फिल्म बहुत अच्छी लगी फ़िल्मीड्रिप वैसे तो इतनी रेटिंग किसी फिल्म को आसानी से नहीं देता है पर यहाँ पर इसे 5 में से 3.5 की रेटिंग दी जाती है आईएमडीबी की ओर से इसे मिले है 6.4 स्टार।

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