Despatch Movie Review: भर-भर के एडल्ट सीन के साथ रिलीज हुई डिस्पैच ,क्या ये घर परिवार के साथ देखने लायक है ?

Written by: Amir khan
Publish On: September 18, 2025 12:58 PM (IST)
Manoj Bajpayee Despatch REVIEW HINDI

मनोज बाजपेई की जब भी कोई फिल्म आने वाली होती है, तब हमें यह उम्मीद होती है कि उनकी फिल्मों में हमें कुछ अलग कॉन्सेप्ट और कंटेंट देखने को मिलेगा। आज मनोज बाजपेई की फिल्म डिस्पैच को ZEE5 के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया गया है।

इसके डायरेक्टर कानू बहल हैं, और प्रोड्यूसर हैं रोनी स्क्रूवाला। डिस्पैच में हमें मनोज बाजपेई के साथ ही शहाना गोस्वामी भी देखने को मिलेंगी। यह फिल्म 21 नवंबर 2024 को IFFI में दिखाई गई थी। आइए करते हैं इस फिल्म का फुल रिव्यू, जिससे कि आपको यह फिल्म देखने में आसानी रहे।

कहानी

फिल्म की कहानी बेस्ड है मुंबई में स्थित ‘डिस्पैच’ नाम की प्रिंट मीडिया हाउस पर। इसी मीडिया संस्थान में ‘जॉय बाग’ नाम का एक क्राइम रिपोर्टर है, जो कुछ खुलासा करने वाला है, अब ये क्या खुलासा करता है, ये आपको फिल्म देखकर पता लगाना होगा। 2 घंटे 33 मिनट की इस फिल्म को आप ZEE5 के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं।

इस फिल्म का अगर हम एक लाइन में रिव्यू करें, तो यह एक एवरेज कैटेगरी में आती है। फिल्म का कॉन्सेप्ट बहुत अच्छा था, एक रिपोर्टर किस तरह से खबरों की सच्चाई को दिखाता है, तरह-तरह के स्कैम को एक्सपोज करता है। पर इस अच्छे कॉन्सेप्ट को निर्देशक फिल्म में अच्छे से प्रेजेंट न कर सके। शायद मनोज बाजपेई अब अपनी स्क्रिप्ट को अच्छे से नहीं पढ़ते हैं, जो किसी भी तरह की स्क्रिप्ट पर काम करना शुरू कर देते हैं।

ऐसा लगता है कि इस फिल्म को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के लिए ही बनाया गया था। क्योंकि वहां के दर्शक अलग होते हैं, और नॉर्मल दर्शक अलग पर्सपेक्टिव से फिल्म को देखता है। फिल्म एक वजह से और भी निराश करती है, जब हमें लगता है कि हम इस फिल्म को अपने परिवार के साथ नहीं देख सकते।

डायरेक्टर कानू बहल ने इससे पहले एक फिल्म बनाई थी, जिसका नाम था ‘आगरा’, और अगर आप आगरा के ट्रेलर को देख लेंगे, तो समझ जाएंगे कि निर्देशक किस तरह की सोच रखते हैं। कुछ तो बात रही होगी कि आगरा फिल्म को इंडिया में बैन कर दिया गया।

डिस्पैच के पॉजिटिव और नेगेटिव पॉइंट

सभी एक्टरों ने अपना बेस्ट परफॉर्मेंस दिया है। सिनेमाटोग्राफी, प्रोडक्शन वैल्यू, बीजीएम सब कुछ डीसेंट है। पर यह सब चीजें डीसेंट होने के बावजूद आप इस फिल्म से कहीं से भी जुड़ाव महसूस नहीं करते। फिल्म देखकर आपको एक उदासी ही महसूस होती है, क्योंकि इससे पहले जो आपने मनोज बाजपेई की फिल्मों में देखा है, वह इसमें देखने को नहीं मिलता।

फिल्म से आपका सबसे खराब एक्सपीरियंस वहां पर होता है, जब आप मनोज बाजपेई को ऐसे एडल्ट सीन करते हुए देखते हैं, जिनको हाल ही में आपने ‘साइलेंस’ और ‘एक बंदा काफी है’ जैसी फिल्मों में दमदार भूमिका अदा करते देखा था।

मनोज बाजपेई को गैंग्स ऑफ वासेपुर के बाद इस तरह की भूमिका करते देखा जा सकता है। यह फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर के इंटीमेट सीन से एकदम आगे बढ़ती दिखती है, जो फिल्म से ज्यादा डॉक्यूमेंट्री की फील देती है।

निष्कर्ष

एक अच्छे कॉन्सेप्ट और कंटेंट को जितना भी खराब तरह से दिखाया जा सकता था, वह इस फिल्म ने दिखाने की पूरी कोशिश की है। डिस्पैच को अपनी फैमिली के साथ बैठकर नहीं देख सकते। मनोज बाजपेई आपको एक बार फिर अपने पुराने अवतार गैंग्स ऑफ वासेपुर की तरह ही दिखाई देने वाले हैं। फिल्मड्रिप की तरफ से इस फिल्म को पांच में से दो स्टार दिए जाते हैं।

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