पानी मूवी रिव्यू
मराठी फिल्म इंडस्ट्री की ओर से एक नई फिल्म रिलीज की गई है, जिसका नाम ‘पानी’ है। बात करें इसके जॉनर की तो यह ड्रामा कैटेगरी में आता है। फिल्म की लेंथ तकरीबन २ घंटे २८ मिनट की है।
जिसका निर्देशन ‘आदिनाथ कोठारे’ ने किया है, जिन्होंने इससे पहले साल 2008 में आई फिल्म ‘फुल 3 धमाल’ को प्रोड्यूस भी किया था। फिल्म की स्टोरी एक ऐसे आदमी पर रची गई है, जो समाज में मौजूद एक बड़ी रोजमर्रा की समस्या को सुलझाता है।
कहानी
मूवी की स्टोरी ‘हनुमंत’ नाम के एक व्यक्ति की जिंदगी पर आधारित है। इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। यह आदिनाथ कोठारे की पहली निर्देशित फिल्म है, जिससे उन्होंने डेब्यू किया है। मूवी के मेन लीड रोल में हनुमंत नजर आते हैं, जिनकी हाल ही में शादी होने वाली है।
जिसके लिए इनका रिश्ता ‘सुवर्णा’ नाम की लड़की से तय होता है, जो कि बाद में लड़की वालों की ओर से मना कर दिया जाता है। बाद में पूछने पर यह पता चलता है कि वे लोग यह रिश्ता नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि हनुमंत के गांव ‘नागदरवाडी’ में पानी की किल्लत सालों साल बनी रहती है, जिसके कारण वहां की महिलाओं को हर रोज पानी लेने के लिए काफी दूर सफर करना पड़ता है।
जिस कारण से वे नहीं चाहते कि उनकी बेटी भी पानी की किल्लत से जूझे। जिसे सुनकर हनुमंत अपनी होने वाली बीवी सुवर्णा से एक वादा करने के लिए बोलता है, जिसमें वह कहता है कि उसके पास एक योजना है, जिससे गांव में पानी की किल्लत को हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है।
जिसके लिए उन्हें पहाड़ पर कुछ गड्ढे करने होंगे, जिनमें धीरे-धीरे बारिश का पानी जमा हो जाएगा, जो कि जैसे-जैसे नीचे आएगा, वैसे-वैसे गांव के कुओं का वाटर लेवल बढ़ना शुरू हो जाएगा, जिससे गांव में पानी की समस्या खत्म हो जाएगी। लेकिन इन सब को करने के लिए हनुमंत सुवर्णा से ४ साल का समय मांगता है।
और उससे सवाल करता है, क्या तुम मेरे लिए 4 साल तक रुक सकोगी, जिसे सुनकर सुवर्णा तैयार हो जाती है। आगे की कहानी में हमें हनुमंत द्वारा गांव में पानी लाने के सफर को खूबसूरती से दिखाया गया है। जिसमें बहुत सी परेशानियों से जूझते हुए कहानी आगे बढ़ती है, जिसे जानने के लिए आपको देखनी पड़ेगी यह खूबसूरत फिल्म, जो कि आपके नजदीकी सिनेमाघर में उपलब्ध है।
टेक्निकल एस्पेक्ट
फिल्म का संगीत काफी अच्छा है, जिसमें इसके बैकग्राउंड म्यूजिक की जितनी भी तारीफ की जाए उतनी कम है। बात करें इसकी सिनेमैटोग्राफी की, तो यह भी बढ़िया से फिल्माई गई है, जिसमें हर एक सीन को काफी सुंदरता से शूट किया गया है।
खामियां
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी लेंथ है, जो काफी ज्यादा है, जिसे इसकी कहानी के हिसाब से सिर्फ डेढ़ घंटे का रखना चाहिए था। फिल्म की दूसरी सबसे बड़ी कमी इसकी लोकेशंस है, जो काफी छोटे स्तर पर दिखाई देती हैं, हालांकि फिल्म के बजट के हिसाब से यह परफेक्ट है।
फाइनल वर्डिक्ट
अगर आपको समाज की असली परेशानियों से जूझती कहानी देखना पसंद है, तो आप इस फिल्म को रिकमेंड कर सकते हैं, जिसमें आपको बेहतरीन लव स्टोरी वाला एंगल भी देखने को मिलेगा, जिससे आप बिल्कुल भी नाखुश नहीं होंगे, हालांकि फिल्म की प्रोडक्शन क्वालिटी काफी कम है, फिर भी इस मामले में इसके मेकर्स की तारीफ की जानी बनती है, जिन्होंने इतने कम बजट में इतनी दमदार फाइनल वर्डिक्ट को हमारे सामने रखा है।
READ MORE
Thukra Ke Mera Pyaar Season 2 कन्फर्म रिलीज़ डेट
C-202 Movie Review: ‘सी 202’ जादू टोना आत्माओ से भरी एक मज़बूत कहानी







