Pallotty 90s Kids Movie Review: ये फिल्म करेगी आपके स्ट्रेस को छूमंतर

Written by: Amir khan
Publish On: September 14, 2025 5:35 PM (IST)
Pallotty 90s Kids review

पल्लोटी 90’स किड्स नाम की एक मलयालम फिल्म 25 अक्टूबर 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज़ की गई है। दो घंटे छह मिनट की इस फिल्म को जितिन राज ने निर्देशित किया है। 53वें केरल राज्य फिल्म पुरस्कारों में ‘पल्लोटी 90’स किड्स’ को कई अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

पहले इस फिल्म को जनवरी 2024 में रिलीज़ करने की योजना बनाई गई थी, पर कुछ कारणों से इस फिल्म को अब अक्टूबर 2024 में रिलीज़ किया गया है। विशेष रूप से यह फिल्म बच्चों के लिए बनाई गई है, पर बड़े भी इस फिल्म को देख सकते हैं। आइए जानते हैं कैसी है यह फिल्म, क्या यह फिल्म आपके समय को डिज़र्व करती है।

आपको 90 का दशक तो याद ही होगा, जब हमारे पास इंटरनेट, सोशल मीडिया न होकर कबड्डी, कैरम, लूडो, गिल्ली डंडा, लंगड़ी टांग, लट्टू, छुपन-छुपाई जैसी छोटी-मोटी खुशियां हुआ करती थीं। इन्हीं पुरानी यादों को एक बार फिर जीवंत करने ‘पल्लोटी 90’स किड्स’ आई है। यह फिल्म हमें हमारे बचपन की गलियों की याद दिलाती है।

पल्लोटी 90’स किड्स रिव्यू

कहानी उन्नी और कन्नन की है, जो एक छोटे से गांव में बड़े-बड़े सपने देखते हैं। इन दोनों के दिन तो दोस्तों के साथ मस्ती करते गुज़रते हैं, पर रात में मां-बाप की मार खाकर। क्योंकि 90 के दशक में यह सब एक आम बात हुआ करती थी। पल्लोटी 90’स किड्स हमें उस दौर की सैर कराती है, जब हमारे पास स्मार्टफोन तो नहीं हुआ करते थे, पर कल्पना और दोस्तों के साथ मस्ती भरपूर हुआ करती थी।

उन्नी और कन्नन बिल्कुल वैसे ही हैं, जैसे हमारे गली के नटखट दोस्त हुआ करते थे। इन दोनों के मां-बाप के एक्सप्रेशन में प्यार और मार दोनों दिखाई देते हैं, जो 90 के दशक में हमें हर फैमिली में देखने को मिलता था। फिल्म को कुछ इस तरह से बनाया गया है कि आपको लगेगा कि आप अपनी बचपन की कहानी को देख रहे हैं।

छोटी-छोटी गलियां, मिट्टी के घर, पेड़ के नीचे बैठे हुए बच्चे, चाट और आइसक्रीम के ठेले, वो सब जो हमने हमारे बचपन में जिया है। फिल्म में मणिकंदन अय्यप्पा का म्यूज़िक काफी प्रभावशाली है, जिनको सुनकर वो पुराने रेडियो वाले गानों की याद आ जाती है। फिल्म देखते वक्त आपको ऐसा लगेगा कि जैसे इस फिल्म को आपके लिए ही बनाया गया हो।

फिल्म में कॉमेडी के साथ-साथ इमोशनल मोमेंट्स भी हैं, जो हमारे दिलों को छू जाते हैं। बच्चों की छोटी-छोटी बातें, शरारतें, बेमतलब का लॉजिक आपको हंसाता भी है और रुलाता भी। जब दो दोस्त उन्नी और कन्नन अलग होते हैं, तब जो दर्द छलकता है, वो सीधे आकर दिल पर लगता है। कहानी हमें यह याद दिलाती है कि 90 के दशक में लोग कितने भावुक और प्यारे हुआ करते थे। फिल्म का क्लाइमेक्स इसे और खास बनाता है।

यह फिल्म हमें संदेश देती है कि बचपन की दोस्ती कभी नहीं टूटती, फिर चाहे कितना भी वक्त बीत जाए, उनकी यादें और बिताया गया हर लम्हा हमारे साथ होता है।

फिल्म के पॉज़िटिव और नेगेटिव पॉइंट

यह फिल्म आपको 90 के दशक की सैर पर ले जाती है, वो भी बिना किसी टिकट के। कहानी कहीं-कहीं पर थोड़ी धीमी लगती है। पर जो लोग पुरानी यादों को जीने के शौकीन हैं, उन्हें यह फिल्म अच्छी लगेगी। यह उस तरह की फिल्म है, जिसे आप पुरानी यादों में खोकर इंजॉय कर सकते हैं। पल्लोटी 90’स किड्स आपके अंदर छुपे हुए बच्चे को दोबारा से जगा देगी। अगर आपने 90 के दशक में अपने खूबसूरत पल बिताए हैं, तो यह फिल्म किसी टाइम मशीन से कम नहीं है।

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