आशिक आबू के निर्देशन में बनाई गई मलयालम फिल्म राइफल क्लब जो एक एक्शन थ्रिलर है। 1 घंटे 55 मिनट की यह फिल्म 19 दिसंबर 2024 को मलयालम भाषा में रिलीज की गई थी। कहानी एक राइफल क्लब की है। पश्चिमी घाट का एक ऐसा एरिया होता है जहां पर राइफल क्लब मेंबर रहा करते हैं जो जानवरों का शिकार करते हैं।
पर अब समय बदल गया है जिस कारण सामान्य तरह से उनकी जिंदगी चल रही है क्योंकि अब पहले की तरह शिकार नहीं किये जा सकते। पर एक दिन इन राइफल क्लब मेंबर की जिंदगी बदल जाती है जब इन सब की भिड़ंत एक खतरनाक हथियारों की स्मगलिंग करने वाले गिरोह से होती है।
तब यह पूरी फिल्म एक सर्वाइवल बन जाती है। इसने इंडियन बॉक्स ऑफिस पर 27 करोड़ का कलेक्शन करके सिनेमा जगत में अपने आप को हिट सिद्ध किया है। अब यह नेटफ्लिक्स पर हिंदी में उपलब्ध करा दी गई है जहां पर यह हिंदी में देखी जा सकती है।
कैसी है राइफल क्लब
यह एक एक्शन थ्रिलर सर्वाइवल फिल्म है जिसमें डार्क थ्रिलर एक्शन देखने को मिलेगा। कौन बचेगा कौन मरेगा जैसे सीरियस सीन फिल्म में देखने को मिलते हैं। कहानी में अनुराग कश्यप को एक खतरनाक गैंगस्टर के रूप में दिखाया गया है।
जो हथियारों की तस्करी करता है। अनुराग कश्यप के दो बेटे होते हैं और यह अपने छोटे बड़े दोनों बेटों से बहुत प्यार करता है। अनुराग के छोटे बेटे के बर्थडे पार्टी पर इसकी मृत्यु हो जाती है। अब यह मृत्यु कैसे होती है यह आपको फिल्म देखकर ही पता लगाना होगा।
बेटे की मौत का बदला लेने के लिए अनुराग कश्यप का बड़ा बेटा उन हत्यारों तक पहुंचता है जो कि इसके छोटे भाई की मौत के जिम्मेदार होते हैं। जब यह बड़ा बेटा अपने भाई के हत्यारों से बदला लेने पहुंचता है तब इसको भी हत्यारों के द्वारा मार दिया जाता है। अनुराग कश्यप का बड़ा बेटा उस जगह पर होता है जहां राइफल क्लब के बहुत से मेंबर रहा करते हैं।
इन राइफल क्लब के मेंबर में बहु बेटा मां बाप सभी शामिल हैं और इन सभी का एक टैलेंट है कि इन्हें राइफल चलाना बहुत अच्छे से आती है। वह किसी को भी कितनी ही दूरी से राइफल के माध्यम से उड़ा सकते हैं। यह प्रोफेशनल किलर ना होकर अपनी अच्छी प्रैक्टिस से इस राइफल क्लब के मेंबर बन जाते हैं।
जब अनुराग कश्यप को पता लगता है कि उसके बड़े बेटे को भी जख्मी कर दिया गया है तब यह अपने पूरे गैंग के साथ इस राइफल क्लब पर हमला कर देता है। अब इन दोनों ग्रुप में आपस में भिड़ंत हो जाती है। फिल्म के सभी एक्शन सीक्वेंस फाइट सीन बहुत अच्छे से पेश किए गए हैं जिसे रेक्स विजयन का बीजीएम और भी प्रभावी बनाता है।
क्लाइमेक्स के सीन में जिस तरह से गन एक्शन सीक्वेंस और फाइट सीक्वेंस बीजीएम के साथ दिखाया जाता है वह बहुत ही शानदार है। कैमरा वर्क और सिनेमैटोग्राफी इसे और भी प्रभावी बनाता है। बहुत कम डायलॉग के साथ यह रिवेंज बदला लेने वाली स्टोरी अपने ट्विस्ट और टर्न के साथ आगे बढ़ती रहती है। कहानी का जो प्लस पॉइंट है वह है इसका बीजीएम और अनुराग कश्यप की एक्टिंग।
पॉजिटिव और नेगेटिव पॉइंट
राइफल क्लब को 28 दिसंबर को रिलीज किया गया था जब मलयालम फिल्म मार्को को रिलीज किया गया था। इसको देखकर आपको महसूस होता है कि एक स्मार्ट स्क्रीन प्ले क्या होता है। आशिक अबू ने जिस तरह से इस फिल्म में मूवमेंट को डाला है वह काफी शानदार है। इससे पहले भी बहुत सारी गैंगवार फिल्मों को देखा जा चुका है पर यहां पर एक घर के अंदर जिस तरह से दो गैंग्स को लड़ते दिखाया गया है जो एक नया एक्सपीरियंस देता है।
हर सीन के पीछे चलता हुआ इसका बीजीएम इसकी शान है। टेक्निकल एक्सपेक्ट की बात करें तो साउंड डिजाइनिंग इतनी अच्छे से की गई है जिसकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है। जिस तरह से घर के अंदर बंदूक के चलने की आवाज को साउंड के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाया गया है वह बिल्कुल रियलिस्टिक फील देने वाला है। ऐसा लगता है कि यह गैंगवार हमारी आंखों के सामने घर में ही हो रही हो।
हर गैंग का मेंबर जिंदा रहने की लड़ाई करता नजर आ रहा है। राइफल क्लब के मेंबर प्रोफेशनली गैंगस्टर नहीं है पर जब इनका सामना प्रोफेशनली गैंगस्टरों के साथ होता है तब राइफल क्लब के मेंबर आपस में इमोशनली कनेक्ट हो जाते हैं। और उनके इमोशंस से दर्शक भी जुड़ जाते हैं।
आशिक अबू ने एक वन लाइन स्टोरी को जिस तरह से दिखाया है वह आलिया भट्ट की जिगरा फिल्म को बनाने वाले वसंत बाला की याद दिलाता है। वसंत बाला अपनी सिंपल कहानियों को जिस तरह से दिखाते हैं वैसा ही कुछ आशिक आबू के डायरेक्शन में भी हमें देखने को मिलता है। नेगेटिव पॉइंट की बात करें तो वानी विश्वनाथ का रोल और भी ज्यादा इंप्रेसिव बनाया जा सकता था जो कि नहीं बनाया जा सका।
टेक्निकल एक्सपेक्ट
फिल्म के सिनेमैटोग्राफी, बीजीएम, कलर ग्रेडिंग, वीएफएक्स, साउंड डिजाइनिंग, डायलॉग डीसेंट है जो इसके प्रति दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहा है। एक घंटा 55 मिनट कब आपकी आंखों के सामने निकल जाते हैं आपको इसका पता भी नहीं चलता। जिस तरह से फिल्म का एक्जक्यूशन किया गया है वहां पर आपको सॉलिड थ्रिलर ड्रामा देखने को मिलता है।
निष्कर्ष
यह 1 घंटे 55 मिनट की फिल्म आपको कहीं पर भी निराश नहीं करती। सबसे अच्छी बात यह है कि आप इसे अपनी पूरी फैमिली के साथ बैठकर देख सकते हैं। जिसे आईएमडीबी की ओर से 7.0 की रेटिंग मिली है। वेस्टर्न घाट के जंगल नहरे और पुरानी बनी हुई इमारतें विजुवल को जिस तरह से फिल्म में कैप्चर किया गया है।
यह आपको एक अलग तरह का सिनेमैटिक एक्सपीरियंस देगा। कहानी का हर एक फ्रेम हमें यह महसूस कराता है कि आप असल में वहां पर मौजूद हैं। अगर आपको रियलिस्टिक एक्शन थ्रिलर फिल्में देखना पसंद है तब आप इसे अपना टाइम दे सकते हैं। यह एक्शन के साथ-साथ इमोशनल का भी दर्शाता है।
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