2 घंटे 23 मिनट की नीरज पांडे द्वारा निर्देशित फिल्म सिकंदर का मुकद्दर आज नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हो चुकी है। नीरज पांडे वह निर्देशक हैं जिन्होंने जियोहॉटस्टार के लिए स्पेशल ऑप्स का निर्माण किया था। इसके साथ इन्होंने अ वेडनसडे, नाम शबाना, अक्षय कुमार के साथ स्पेशल 26, और बेबी जैसी फिल्में भी बनाई हैं। इनके द्वारा बनाई गई सभी फिल्में हम सभी की फेवरेट रही हैं। आइए करते हैं सिकंदर का मुकद्दर का फुल रिव्यू।
60 करोड़ के हीरे चोरी। एक लंबी तलाश। और एक इंस्पेक्टर जो नहीं मानेगा हार।
सिकंदर का मुकद्दर, अब नेटफ्लिक्स पर।
सिकंदर का मुकद्दर रिव्यू
इस फिल्म की राइटिंग, स्क्रीनप्ले और निर्देशन सब कुछ परफेक्ट है। यह आपको शुरू से लेकर आखिर तक पूरी तरह से इंगेज करके रखती है। फिल्म खुद को आगे बढ़ाते-बढ़ाते बहुत सारे ट्विस्ट और टर्न देकर जाती है।
आईएमडीबी पर लिखी गई स्टोरी के अनुसार, अगर इसकी कहानी पर नजर डालें तो हीरे की चोरी के अपराधी को एक पुलिस वाला ढूंढ रहा है और इस पुलिस वाले के लिए इस अपराधी को ढूंढना एक जुनून बन गया है। यह पुलिस वाला तब तक इसे तलाशता रहता है जब तक यह अपराधी इसे मिल नहीं जाता।
फिल्म को नीरज पांडे और विपुल के रावल द्वारा लिखा गया है, और जिस तरह से फिल्म को लिखा गया है, उसी तरह से प्रेजेंट भी किया गया है।
फिल्म में टॉम एंड जेरी की तरह शातिर अपराधी और पुलिस वाले एक-दूसरे के 15 साल तक पीछे पड़े रहते हैं, और इन 15 सालों में क्या-क्या घटनाएं घटित होती हैं, वह सब आपको यह फिल्म देखकर ही पता लगाना होगा।
जिमी शेरगिल ने पुलिस इंस्पेक्टर का रोल निभाया है। इन्होंने इस फिल्म को अपना हंड्रेड परसेंट बेस्ट काम दिया है।
यह ढाई घंटे की फिल्म आपको पूरी तरह से इंगेज करके रखती है। कहानी कहीं पर भी ठंडी या बोर नहीं पड़ती। फिल्म के क्लाइमेक्स में आपको कुछ ट्विस्ट और टर्न देखने मिलते हैं, जो एक सरप्राइज की तरह हमारे सामने पेश किए जाते हैं।
इस फिल्म की लास्ट में आपको एक क्लिफहैंगर भी देखने को मिलता है, जिससे लगता है कि इसका पार्ट 2 भी हमें जल्द देखने को मिलेगा। कहानी को यहां पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। अगर इसका पार्ट 2 न आए तो कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।
पॉजिटिव एंड नेगेटिव पॉइंट
हीरे की चोरी को थोड़ा और बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता था, जो कि फिल्म में नहीं किया गया।
पिछले दिनों अजय देवगन की फिल्म औरों में कहां दम था की तरह ही इस फिल्म में भी हमें पास्ट और प्रेजेंट की स्टोरी चलती दिखाई देती है। कैरेक्टर की जर्नी आपको पूरी तरह से फील होती दिखेगी। यह फिल्म कहीं से भी बोर नहीं करती।
यह पूरी तरह से थ्रिल से भरी हुई है। इसके सभी कैरेक्टर्स के साथ आप इमोशनली जुड़ जाते हैं, जिन्हें देखकर आपको ऐसा लगता है कि इन कैरेक्टर्स के साथ अब सब कुछ अच्छा ही होता रहे। फिल्म ने अपने स्क्रीनप्ले से पूरी तरह से एक्साइटमेंट को बरकरार रखा है।
बस फिल्म का क्लाइमेक्स थोड़ा प्रिडिक्टेबल है, जो आप सोचेंगे, आपको वैसा ही देखने को मिल जाएगा। इसमें कहीं-कहीं पर थोड़ी डार्क कॉमेडी का इस्तेमाल हुआ है।
अविनाश तिवारी ने अपने रोल को बहुत अच्छे से निभाया है। तमन्नाह भाटिया एवरेज काम करती दिखी हैं। फिल्म में हमें खिचड़ी के प्रफुल्ल भी देखने को मिलेंगे, हालांकि इन्हें बहुत कम स्क्रीन टाइम दिया गया है, पर जो भी दिया गया है, वह अच्छा है। फिल्म का म्यूजिक और बीजीएम परफेक्ट है और कहानी से मेल खाता है।
निष्कर्ष
फिल्म के क्लाइमेक्स पर अगर थोड़ा और काम कर दिया जाता, तब यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म बन जाती, पर फिर भी यह पूरी फिल्म आपको इंगेज करके रखेगी और एंटरटेन करेगी। आप इस फिल्म को अपना टाइम दे सकते हैं।
आप इसे अपनी पूरी फैमिली के साथ बैठकर भी देख सकते हैं। इसमें किसी भी तरह का एडल्ट सीन और वल्गैरिटी नहीं दिखाई देती। हमारी तरफ से इस फिल्म को दिए जाते हैं पांच में से तीन स्टार।
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