फिल्म ‘स्मॉल थिंग्स लाइक दीज़’ चर्च की मनोहर घंटियों की आवाज़ से शुरू होती है, या यूँ कहें कि फिल्म उन्हीं घंटियों की आवाज़ से ही खत्म भी होती है, पर फर्क सिर्फ इतना है कि जब यह फिल्म शुरू होती है, तब आपके दिल में काफी उत्सुकता बनी होती है, और इसके उलट जब यह खत्म होती है, तब आप एक अनूठा एहसास इसके प्रति फील करते हैं।
डायरेक्टर ‘टिम मिएलेंट्स’ की ओर से एक ऐसी अनूठी फिल्म निकल कर सामने आई है, जो कि क्लेयर कीगन के उपन्यास पर आधारित है, जहाँ पर क्रिसमस की खुशियाँ और आयरलैंड जैसे शहर का शांत माहौल देखने को मिलता है। फिल्म की लंबाई की बात करें, तो यह एक घंटा 38 मिनट की है, जिसका जॉनर हिस्ट्री और ड्रामा की कैटेगरी में आता है। फिल्म के मुख्य किरदार में ‘एलीन वॉल्श’ नज़र आती हैं, जिन्हें आपने इससे पहले फिल्म ‘पीकी ब्लाइंडर्स’ में देखा होगा।
स्टोरी
फिल्म के मुख्य किरदार में ‘बिल फर्लॉन्ग’ (सिलियन मर्फी) और उनकी पत्नी एलीन फर्लॉन्ग (एलीन वॉल्श) नज़र आते हैं, जो कोयले का काम करते हैं और इनकी पाँच बेटियाँ भी हैं। लेकिन जब बिल हर दिन की तरह ही एक दिन अपने काम से वापस आ रहे थे, तब वे एक महिला को अपने पति द्वारा उत्पीड़न करते हुए देखते हैं,
जिसे देखकर वह इतने ज़्यादा चिंतित हो जाते हैं कि अपने घर की ओर भागते हैं और वहाँ जाकर जब वह अपनी पाँचों बेटियों को सही-सलामत देखते हैं, तब उन्हें काफी सुरक्षित महसूस होता है। लेकिन दूसरी तरफ उन्हें यह चिंता सताने लग जाती है कि उनकी बेटियाँ भी लड़कियाँ हैं और उन्हें भी कभी ना कभी अपने घर जाना है। आगे की कहानी में बिल की स्टोरी का फ्लैशबैक दिखाया जाता है, जो कि उसके बचपन से शुरू हुआ है,
और फिल्म का ज्यादातर हिस्सा फ्लैशबैक में ही चलता है, जिसमें दिखाया गया है कि बिल एक लावारिस है, जिसे सारा नाम की औरत ने गोद ले लिया था और वह विल्सन फैमिली के एक बड़े से घर में नौकरानी का काम करती थी। मिसेज़ विल्सन, जो कि एक अनाथालय भी चलाती थी,
जिसमें कई बार महिलाओं पर काफी क्रूर अत्याचार भी किया जाता था। यह सब जानने के बावजूद भी बिल की माँ सारा खामोश रहती थी और वह बिल को भी यही समझाती थी कि वह भी खामोश रहे, क्योंकि विल्सन फैमिली के इन दोनों पर काफी एहसान हैं।
आगे की कहानी में क्या होता है और क्यों वे विल्सन फैमिली के एहसानों तले दबे हैं, यह सब जानने के लिए आपको देखनी पड़ेगी फिल्म, जो कि फिलहाल आपके नज़दीकी सिनेमाघरों में उपलब्ध है। हालांकि फिल्मी ड्रिप के अनुसार, जल्दी ही ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेज़न प्राइम वीडियो पर भी इसे हिंदी में रिलीज़ कर दिया जाएगा।
खामियाँ
फिल्म की बड़ी कमी इसकी स्टोरी लाइन है, जो कि डॉक्यूमेंट्री पर बेस्ड है और एक नोवेल से ली गई है। यह सभी दर्शकों को पसंद नहीं आएगी। कहानी को रियलिस्टिक बनाने के लिए काफी सिंपल वे में दर्शकों के सामने रखा गया है, जिससे यह देखने में काफी स्लो हो जाती है, यह भी इसके लिए एक बड़ा डिसएडवांटेज है।
अच्छाइयाँ
फिल्म की स्टोरी नोवेल पर बेस्ड है, जिसमें काफी सिम्पलिसिटी नज़र आती है, जो कि किसी भी डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए एक वरदान है। यह 1960 के दशक की स्थितियों को दिखाती है, जो कि एक काफी कठिन टास्क है, जिसमें डायरेक्टर टिम मिएलेंट्स पूरी तरह से कामयाब हुए हैं।
फाइनल वर्डिक्ट
अगर आपको डॉक्यूमेंट्री फिल्में देखना पसंद है, जिन्हें देखकर हिस्ट्री के बारे में और अधिक जानकारी हासिल हो सके, तो आप इस फिल्म को रिकमेंड कर सकते हैं। जो कि आपको आयरलैंड के पुराने समय की सच्चाई को दिखाती हुई नज़र आती है। फिल्म की न्यूडिटी रेटिंग की बात करें, तो यह ज़ीरो है। फैमिली के साथ भी इसे देख सकते हैं।
हमारी तरफ से इस फिल्म को दिए जाते हैं 2.5/5 ⭐⭐½।
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