आज 14 फरवरी 2025 को सिनेमाघरों में विक्की कौशल की फिल्म छावा दस्तक दे चुकी है। फिल्म के धुंआधार ट्रेलर से ही इस फिल्म का फैंस को बेसब्री से इंतजार था।
विक्की कौशल इससे पहले भी उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक, उधम सिंह और सम बहादुर जैसी फिल्मों में अलग-अलग किरदार निभा चुके और इस बार ‘छावा’ में वह छत्रपति संभाजी की दमदार भूमिका निभाते दिखे अगर आप भी ये फिल्म देखने जा रहे हैं तो पहले जानें इस फिल्म का रिव्यू।
अक्षय खन्ना और रश्मिका मंदाना जैसे कलाकारों से सजी फिल्म
सबसे पहले बात करते हैं फिल्म के कलाकारों की तो इस फिल्म में बॉलीवुड एक्टर अक्षय खन्ना औरंगजेब का किरदार निभा रहे हैं जिन्हें आप फिल्म में पहचान नहीं पाएंगे औरंगजेब के किरदार में अक्षय खन्ना ने इतनी जबरदस्त एक्टिंग की है
कि तारीफ के लायक वहीं दूसरी तरफ विक्की कौशल छत्रपति संभाजी के किरदार में एक वीर योद्धा के रूप में नजर आए इसी के साथ फिल्म रश्मिका मंदाना येसुबाई का,दिव्या दत्ता सोयराबाई का, आशुतोष राणा हम्बीर राव का किरदार निभा रहे हैं इसके अलावा फिल्म में डायना पenty,सारंग साठये और प्रदीप सिंह रावत जैसे कई कलाकार शामिल हैं।
कहानी
कहानी की शुरुआत होती है अजय देवगन की आवाज से जहां वह मुगल सम्राट औरंगजेब की क्रूरता शिवाजी महाराज की वीरता का परिचय देते हैं। अगला सीन शुरू होता है औरंगजेब के दरबार से जहां उनके दरबारियों द्वारा यह संदेश मिलता है कि शिवाजी महाराज नहीं रहे। जिसे सुनकर औरंगजेब की प्रजा के बीच खुशी का माहौल उमड़ पड़ता है और सभी लोग उत्सव मनाने लगते हैं।
कहानी की लंबाई 2 घंटे 41 मिनट की है ट्रेलर को देखकर ही पता लग गया था कि कहानी छत्रपति शिवाजी महाराज के बेटे संभाजी महाराज की है। संभाजी महाराज को अपने मां-बाप के बिना बहुत कम आयु में एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है या कहें इनके कंधे पर डाल दी जाती है।
कहानी की खास बातों पर अगर ध्यान दिया जाए तो यहां पर ब्रूटालिटी के साथ-साथ औरंगजेब को किस तरह से छावा मिटाता है। यह सब तो फिल्म में देखने को मिलता ही है और इसके साथ ही मां-बाप और पत्नी का एक अच्छा पहलू भी दिखाया गया है। साथ ही राजनीतिक छल कपट धोखा देना जो उस दौर से इस दौर में भी आम सा है ये सब भी देखने को मिलता है।
अगर आपको इतिहास के पुराने पन्नों को पढ़ने का शौक है तब आप इस हफ्ते छावा फिल्म को सिनेमाघर में जाकर देख सकते हैं।
छावा फिल्म के नेगेटिव पॉइंट
फिल्म की लेंथ
छावा की जो सबसे निराश करने वाली चीज लगी वह है इसकी लंबाई जो कि थोड़ी कम की जा सकती थी।
कास्टिंग
कास्टिंग को अगर देखा जाए तो विक्की कौशल के अलावा एक भी कैरेक्टर की कास्टिंग ठीक से नहीं की गई।जिसमें रश्मिका मंदाना को फिल्म में इसलिए लिया गया कि हाल ही में उनकी एनिमल फिल्म से वह कुछ ज्यादा ही फेमस हो गई थी,और कोई वजह नहीं थी रश्मिका मंदाना को छावा में लेने का। रश्मिका को सबसे पहली बात तो मराठी बोलना नहीं आती ,तब यहां पर एक अच्छी मराठी बोलने वाली अभिनेत्री को यह रोल देना चाहिए था।
अक्षय खन्ना के कैरेक्टर से कहीं ज्यादा प्रभावी तो आशुतोष राणा और विनीत कुमार के कैरेक्टर देखने को मिलते हैं दिव्या दत्ता की जो कास्टिंग की गई है वह भी ठीक नहीं है कास्टिंग डिपार्टमेंट अपना पूरा फोकस विक्की कौशल के ऊपर ही रखता है। बाकी कास्ट कैसी भी हो इन पर किसी भी तरह का कोई भी फर्क नहीं पड़ता क्योंकि यह एक बड़े बजट की फिल्म है जिसे बहुत जल्दबाजी में बनाया गया है।
वीएफएक्स
साफ तौर पर देखा जा सकता है कि वीएफएक्स में उतना दम नहीं है जितना कि एक हाई बजट फिल्म में होना चाहिए था।
म्यूजिक
मराठा फिल्मों में जिस तरह का बीजीएम होना चाहिए वह यहां पर सुनने को नहीं मिलता तो बीजीएम ने भी पूरी तरह से निराशा ही किया है।
छावा फिल्म के पॉजिटिव प्वाइंट
पूरी फिल्म का भार विक्की कौशल ने अपने कंधों पर उठाया है विक्की कौशल ने अपने कैरेक्टर के दम पर दर्शकों को यह यकीन करवा दिया कि वह छत्रपति संभाजी महाराज ही हैं वहीं अगर रश्मिका मंदाना की बात की जाए तो शायद इनको इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह जो कैरेक्टर निभा रही हैं वह लोगों के लिए कितना महत्वपूर्ण है।
क्लाइमेक्स के सीन में ए आर रहमान ने अपने दमदार म्यूजिक के बल पर जिंदा रहने गाने में जो फील दिखाया है वह सिनेमा घर से बाहर निकलने के बाद भी आपको याद रहेगा। कहानी के लास्ट के 20 मिनट बहुत इंगेजिंग हैं अगर इसे संजय लीला भंसाली के द्वारा बनाया जाता तो शायद यह कहीं बेहतर बन सकती थी क्योंकि वो कहते हैं न हर डायरेक्टर हर तरह की फिल्में बनाने में माहिर नहीं हो सकता ।
निष्कर्ष
छावा फिल्म को विक्की कौशल के शानदार अभिनय और हिस्ट्री को जानने के लिए एक बार देखा जा सकता है एक बड़े बजट में बनी छावा में हमें शानदार सिनेमैटोग्राफी के दर्शन होते हैं जो कि उस दौर की याद दिलाता है।
कहानी पहले हाफ में उतनी तेज नहीं है जितनी तेजी या अपने दूसरे हाफ में दिखाती है इसके अंत के बीस मिनट कुछ इस तरह से पेश किए गए हैं जो इसकी अगली पिछली सभी बुराइयों को भुलाने पर मजबूर कर देता है छावा को पूरी फैमिली के साथ बैठकर देखा जा सकता है स्ट्रांग कहानी के बल पर फिल्मी ड्रिप की ओर से इसे पांच में से तीन स्टार दिए जाते हैं।
READ MORE







