Dabba Cartel Series Review: शाबाना आज़मी का छुपा हुआ अवतार।

Written by: Anam
Publish On: September 27, 2025 11:25 PM (IST)
dabba cartel review

आजकल ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एक से बढ़कर एक सीरीज और मूवी रिलीज होती हैं और आज 28 फरवरी शुक्रवार के दिन भी एक जबरदस्त सीरीज ने दस्तक दी है जिसका नाम है डब्बा कार्टेल। हितेश भाटिया द्वारा निर्देशित नेटफ्लिक्स की नई वेब सीरीज डब्बा कार्टेल रिलीज हो चुकी है।

शबाना आज़मी के दमदार किरदार वाली यह सीरीज एक क्राइम थ्रिलर है जिसमें चार आम और मजबूत महिलाएं ड्रग्स का काम करती हैं। इस सीरीज में कुल सात एपिसोड हैं और प्रत्येक एपिसोड की लंबाई 40 से 45 मिनट की है। अगर आप इस सीरीज को देखने का मन बना रहे हैं तो यह रिव्यू आपके लिए है।

कास्ट:

शबाना आज़मी, ज्योतिका, शालिनी पांडे, निमिषा सजायन, अंजली आनंद, गजराज राव और साईं तमनकर आदि।

कहानी क्या कहती है:

फिल्म की कहानी मुख्य रूप से दो टाइमलाइन पर आधारित है जिसमें एक तरफ चार महिलाएं शामिल हैं तो दूसरी तरफ ‘मोदल्ला ‘ नाम के ड्रग्स की जांच-पड़ताल चल रही है। कहानी की शुरुआत पंजाब के दो कपल से होती है जिसमें पति कार में बैठा होता है और पत्नी ड्राइव कर रही होती है।

अचानक दोनों का एक्सीडेंट हो जाता है जिसमें पत्नी अपनी जान गंवा देती है और उसके पर्स में मिलती है एक दवा की डिब्बी जिसपर मॉडेला लिखा होता है। फिर कहानी मुंबई में दिखाई जाती है जहां पांच महिलाओं की कहानी सामने आती है।

इसमें एक तरफ राजी (शालिनी पांडे), उसकी सास शिला (शबाना आज़मी) और उसकी बिजनेस पार्टनर माला (निमिषा सजायन) जो एक कामवाली है, दूसरी तरफ शाहिदा (अंजली आनंद) जो एक फ्लैट ब्रोकर है। राजी डब्बा पार्सल का काम करती है जिसमें वह शहर में खाने के डिब्बों को घर-घर पहुंचाती है।

माला एक कामवाली बाई है और राजी के साथ मिलकर काम भी करती है। वहीं शाहिदा फ्लैट ब्रोकर है और वह राजी और माला को एक फ्लैट किराए पर दिलवाती है जिससे वे अपने डब्बे वाले बिजनेस को आगे बढ़ा सकें। लेकिन कहानी नया मोड़ तब लेती है जब माला का बॉयफ्रेंड उसे ब्लैकमेल करने लगता है और इस ब्लैकमेलिंग से बचने के लिए माला को मजबूरन डिब्बों में ड्रग्स रखकर बेचना पड़ता है।

वहीं राजी जल्द ही मां बनने वाली है और उसका पति यह बच्चा नहीं चाहता क्योंकि वह तीन लोगों का खर्च नहीं उठा सकता। इसी के चलते अपने होने वाले बच्चे को पालने के लिए राजी भी माला और शाहिदा के साथ डब्बे का कारोबार करने लगती है।

दूसरी ओर पारुल, जो मोदल्ला ड्रग्स के कारण एक्सीडेंट में अपनी जान गंवा चुकी है, उसके केस की पड़ताल कर रहा अंडरकवर ऑफिसर पारुल की मौत के पीछे का राज जानने के लिए चंडीगढ़ रवाना होता है क्योंकि इस केस के तार चंडीगढ़ से जुड़े हैं जिसमें विवा लाइफ नाम की कंपनी शामिल है।

कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब राजी को पता चलता है कि उसकी सास शिला जो देखने में शांत स्वभाव की है, उनका अतीत रहस्य और जुर्म से भरा हुआ है। अब क्या यह मोदल्ला ड्रग्स बनाने वाली फार्मास्यूटिकल कंपनी पकड़ी जाएगी और क्या यह चारों महिलाएं इस दलदल से निकल पाएंगी, यह जानने के लिए आपको डब्बा कार्टेल देखनी होगी।

तकनीकी पहलू: कैमरा, बैकग्राउंड म्यूजिक और सिनेमाटोग्राफी

सीरीज के तकनीकी पहलुओं की बात करें तो रहस्यमयी सीन में बैकग्राउंड म्यूजिक जान डाल रहा है जैसे तेज बारिश वाले सीन में बारिश की झमझमाती आवाज। मेकर्स ने सिनेमाटोग्राफी पर भी जबरदस्त काम किया है। सीरीज का स्क्रीनप्ले कसा हुआ और मजबूत है।

सीरीज की खामियां:

कहानी के पहले एपिसोड की धीमी गति: किसी भी फिल्म के लिए पहला एपिसोड बहुत महत्वपूर्ण होता है जहां दर्शक ठहरते हैं लेकिन डब्बा कार्टेल के साथ ऐसा नहीं है। पहले एपिसोड में आपको बहुत धैर्य रखना पड़ेगा और कहानी को समझने के लिए दूसरे एपिसोड तक जाना जरूरी है। कहानी के बीच-बीच में फोकस की कमी: अच्छी कहानी होने के बावजूद कई जगह फोकस कमजोर दिखता है जिसे और मजबूती से प्रस्तुत किया जा सकता था। इसका कारण पुरुषों का कई सीन में महिलाओं पर बेवजह भारी पड़ना है।

सीरीज की खूबियां:

शबाना आज़मी का रहस्यमयी किरदार:
सीरीज की खूबियों में सबसे पहले शबाना आज़मी का नाम आता है। शुरुआती एपिसोड में वे कहीं खोई हुई लगती हैं लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है उनका दमदार और रहस्यमयी किरदार निखरकर सामने आता है। उनकी बहू राजी जिस दुनिया में फंसी है, उसे शिला अपने अतीत में जी चुकी हैं। उनके किरदार के साथ एक दमदार डायलॉग भी है, “माल तेरा होगा लेकिन मार्केट मेरा है।”

महिलाओं के अलग रूप का प्रस्तुतीकरण:

ड्रग्स पर कई फिल्में बनी हैं लेकिन उनमें पुरुषों को आगे रखा गया। डब्बा कार्टेल में चार महिलाएं ड्रग्स का बड़ा धंधा चलाती हैं जो एक नया और मजबूत किरदार दिखाता है।

फाइनल वर्डिक्ट:

धीमी रफ्तार से शुरू होने वाली डब्बा कार्टेल अगले एपिसोड के साथ कब स्पीड पकड़ती है, यह देखना लुभावना है। महिलाओं के सशक्तिकरण और मजबूत व्यक्तित्व को देखना एंटरटेनिंग है। जहां पुरुष प्रधान छवि बनी हुई है, वहीं इस सीरीज में महिलाओं के एक अलग रूप को बढ़-चढ़कर दिखाया गया है, हालांकि यह उतना नहीं है जितना हो सकता था। अगर आप यह सीरीज देखने का सोच रहे हैं तो बेझिझक देख सकते हैं।
फिल्मीड्रिप रेटिंग: 3.5/5

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