बंगाली एक्टर की कामयाबी का राज, “एस्पिरेशन नहीं निपुणता तय करती है कामयाबी”

Written by: Amir khan
Publish On: October 2, 2024 7:27 PM (IST)
dibyendu bhattacharya life story

Dibyendu Bhattacharya: बंगाल में जन्मे एक ऐसे कलाकार जिन्होंने कई कामयाब फिल्मे इंडस्ट्री को दी है जिसमें उनकी बंगाली और हिंदी सभी फिल्मे शामिल है नेगेटिव रोल के लिए स्पेशली जाने जाने वाले एक्टर Dibyendu Bhattacharya ने अपने एक इंटरव्यू में जो Bollywood Now के द्वारा लिया गया था, अपनी लाइफ से रिलेटेड कई ऐसे अनसुने राज जो उन्हें कामयाबी तक ले आये हम सबके साथ शेयर किये और उनकी कामयाबी में परिवार कितना सहयोगी रहा किस प्रकार परिवार ने dibyendu bhattacharya को उनके निपुणता वाले क्षेत्र में जाने के लिए प्रोत्साहित किया और किस प्रकार उनका हिंदी फिल्मों में आना कहीं न कहीं कामयाबी की उस बुलंदी तक नहीं ले जा पाया जिसमें वो बंगाली फिल्मे करते हुए जा सकते थे इनसब बातों पर आज हम प्रकाश डालेंगे अपने इस आर्टिकल में ताकि Dibyendu Bhattacharya के फैंस को उनकी जिंदगी से जुड़ी कई बातें पता चल सके

1- Dibyendu Bhattacharya का संक्षिप्त जीवन परिचय-

दिब्येंदु फिल्म इंडस्ट्री में नेगेटिव रोल्स के लिए विशेष रूप से जाने जाते है जिनका जन्म पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में 11 नवंबर 1975 में हुआ था और इन्होने अपनी शिक्षा नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से प्राप्त की थी।इंटरव्यू में पूछे गए सवाल, के एक्टिंग के बारे में उन्होंने कैसे सोचा, दिब्येन्दू ने जवाब दिया की नोर्मली बच्चों की तरह बचपन में उन्हें भी आर्ट्स, कम्पटीशन, नए नए एक्सपेरिमेंट में दिलचस्पी थी और फैमिली का भी स्पेशली माँ का कोई प्रेशर नहीं था की क्या करना है और क्यों।

2- ऐसे हुई एक्टिंग की शुरुआत –

अपनी हायर एजुकेशन के दौरान एक प्ले में पार्टिसिपेट करने के बाद उन्हें इस बात का एहसास हुआ की एक्टिंग ही उनके लिए बेस्ट चीज है जिस क्षेत्र में कुछ कर सकते है और उनकी माँ ही वो शख्स थी जिन्होंने उनका पूरा सपोर्ट किया।1988 में एक्टिंग की दुनिया में एक छोटे से रोल के साथ कदम रख दिया था उसके बाद 2001 में मानसून वेडिंग नाम की फिल्म से इन्होने अपनी पहचान दर्शकों के दिलों में बनाई और फिर एक के बाद एक बेहतरीन फिल्मे जैसे – मकबूल 2003,हजारों ख्वाहिशे ऐसी 2003, एतबार 2004, अब तक छप्पन 2004, मंगल पांडे 2005, धन धना धन गोल 2007, देव डी 2009 2015 में गुड्डू रंगीला,सैक्रेड गेम्स के एक एपिसोड में2018, क्रिमिनल जस्टिस 2019,सेक्शन 375 – 2019,लाल बाजार 10 एपिसोड 2020,मिर्जापुर 4 एपिसोड 2020, अनदेखी 18 एपिसोड 2020 से 2022, खुदा हाफिज चैप्टर 2 2022,आर या पार एपिसोड 1 2022,मिशन रानीगंज 2023,और हाल ही में 2024 में रिलीज हुई

फिल्मे और टीवी शोज इस प्रकार है

पोचर 8 एपिसोड , महारानी 12 एपिसोड , बोनबीबी फिल्म।

3- Dibyendu Bhattacharya की सफलता का मूलमंत्र, अपनी इच्छा नहीं बल्कि अपनी विशेषता वाले क्षेत्र में जाना चाहिए –

दिव्येंदु भट्टाचार्य ने अपने इंटरव्यू में सफलता का राज बताते हुए फैंस के लिए सफलता की मेन कुंजी शेयर की दिव्येंदु ने बताया कि अगर व्यक्ति अपने जीवन में सफलता पाना चाहता है तो उसे अपनी महत्वाकांक्षा की ओर नहीं जाना चाहिए और ना ही इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि क्या चीज ट्रेंडिंग में है सारे लोग किस तरफ जा रहे हैं बल्कि उसे अपने अंदर की विशेषता पर ध्यान देना चाहिए कि वह कौन सा क्षेत्र है जिसमें हम अपना बेस्ट दे सकते हैं अपने अंदर इस बात का आकलन करने के बाद ही किसी भी क्षेत्र में कदम रखना इंसान को कामयाबी की तरफ ले जाता है। दिव्येंदु ने अपने बचपन का एक किस्सा शेयर करते हुए बताया कि अपनी हायर एजुकेशन के दौरान स्कूल के एक फंक्शन के लिए प्ले में एक्टिंग करने के बाद लोगों के द्वारा मिली रिगार्डिंग और प्रेज के बाद उन्हें इस बात का एहसास हुआ की एक्टिंग ही वह क्षेत्र है जिसमें अच्छी कामयाबी उनका इंतज़ार कर रही है।

4- Dibyendu Bhattacharya ने हमेशा रंग पर आधारित भेदभाव का किया सामना –

दिव्येंदु ने अपने इंटरव्यू में इस बात को भी फैंस के साथ शेयर किया कि किस प्रकार उन्हें एक्टिंग के इतिहास में रंग से जुड़े भेदभाव का सामना हर मोड़ पर करना पड़ा। दिव्येंदु को इस बात का हमेशा अफसोस रहेगा कि वह उनका काला रंग ही था जिसकी वजह से दिव्येंदु जैसे अच्छे एक्टर हमेशा लीड रोल से दूर रहे। नेगेटिव रोल में तो उन्हें फैंस ने खूब पसंद किया और मेकर्स ने भी उन्हें एक के बाद एक कई फिल्में ऑफर की और उन्होंने अपने करियर में लगभग 65 के ऊपर फ़िल्में और शो किए हैं जिसमें उन्हें आला दर्जे के नेगेटिव रोल्स तो दिए गए लेकिन एक हीरो की तरह कामयाब बनने में हमेशा उनका काला रंग आड़े आया और इस बात का उन्हें हमेशा कहीं ना कहीं थोड़ा सा दुख जरूर रहेगा। दिव्येंदु भट्टाचार्य कहते हैं कि व्यक्ति का रंग ही यह निश्चित करता है कि उसे फिल्म में निगेटिव रोल मिलेगा या फिर हीरो का रोल इसके लिए उसकी योग्यता या फिर निपुणता मायने नहीं रखती है जितना उन्होंने अपनी जिंदगी में एक्सपीरियंस किया है उसके हिसाब से व्यक्ति का काला या गोरा होना ही इस बात का निश्चय करता है।

5 – Dibyendu Bhattacharya कोविड के समय नहीं दे पाए माँ को अंतिम अग्नि –

दिव्येंदु भट्टाचार्य ने अपने इसी इंटरव्यू में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए बताया कि कोविद की दूसरी लहर के समय, मई 2021 में जब फ्लाइटों का आवा गवन पूरी तरह से बैन हो चुका था तब उनकी मां की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई थी। दरअसल वह समय दूसरे लॉकडाउन का था जिसके चलते उन्हें किसी भी अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया था। दिव्येंदु भट्टाचार्य उस समय तुर्की में अपनी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। परिनीति चोपड़ा के साथ कुछ अन्य लोग भी थे जो उनके इस सबसे बड़े दुख में साथ थे लेकिन लॉकडाउन के चलते वो अपनी माँ के अंतिम संस्कार में भी नहीं शामिल हो पाए और अपने आँसुओ को बहा कर नेक्स्ट डे फिरसे काम पर गए ताकि जल्दी से जल्दी शूटिंग पूरी हो पाए और वो वापस अपने देश अपने घर लौट सके।

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