ज़िंदगी मिलेगी दोबारा, इस फिल्म को न ही सिनेमाघरों में और न ही ओटीटी पर रिलीज़ किया जा रहा है, बल्कि इसे डायरेक्ट टीवी पर रिलीज़ किया जा रहा है। कहाँ और किस दिन देखने को मिलेगी यह फिल्म, आइये जानते हैं।
ज़िंदगी मिलेगी दोबारा अबीर सेनगुप्ता के द्वारा लिखी गयी है, और इसका निर्देशन किया है अरव जिंदल ने। यह फिल्म हमें आज के समाज की सच्चाई को दिखाती है, जहाँ रिश्तों से मोबाइल की अहमियत कहीं ज़्यादा दिख रही है। टीनएज के बच्चे किस तरह मोबाइल के ट्रैप में फँसते चले जा रहे हैं, इन्हें खुद नहीं पता होता।
घरों में सब बैठे तो एक साथ होते हैं, पर बिना किसी से बात करे अपने-अपने मोबाइल के साथ। यह एक चिंता का विषय है, और इस पर ध्यान देना ज़रूरी है।
कहानी
कहानी व्योम नाम के एक लड़के से शुरू होती है, जिसे मोबाइल की वर्चुअल दुनिया से इस कदर लगाव हो जाता है कि वह हर समय इसी में खुद को व्यस्त रखने लगता है। गेम की लत मोबाइल फोन से भी कहीं अधिक है। व्योम की मम्मी को आभास हो जाता है कि अब पानी सिर से ऊपर जाने वाला है। अगर अभी व्योम को इस भ्रामक दुनिया से न निकाला गया, तो इसके अंदर से रिश्तों की अहमियत, फैमिली कुछ भी मायने नहीं रखेगी।
यह फिल्म देखनी भी चाहिए और बच्चों को दिखानी भी चाहिए। फिल्म हमें क्या गलत और क्या सही, इसके बीच के अंतर को सिखाने में हमारी मदद करेगी।
कब और कहाँ देखें ज़िंदगी मिलेगी दोबारा
ज़िंदगी मिलेगी दोबारा फिल्म को आप ज़ी सिनेमा के टीवी चैनल पर 20 दिसंबर 2025 को शाम के 7:30 बजे देख सकेंगे। इस फिल्म को सिनेमाघरों और ओटीटी पर रिलीज़ करने का कोई प्लान नहीं है, क्योंकि फिल्म में एक सामाजिक संदेश छिपा है। इसलिए मेकर्स यही चाहते हैं कि इसे ज़्यादा से ज़्यादा लोग देखें और सीखें कि अपने बच्चों को किस तरह से मोबाइल की दुनिया से छुटकारा दिलाकर उन्हें एक अच्छी ज़िंदगी दी जा सकती है।
बच्चों पर मोबाइल का नकारात्मक असर
बच्चों पर मोबाइल का बहुत नकारात्मक असर देखने को मिलता है, जैसे कि बच्चों का चिड़चिड़ापन, शरीर पर गलत असर, नींद न आना, भूख में कमी, आँखों का कमज़ोर होना, और बच्चों को लोगों से मिलने-जुलने में असहजता महसूस होना, खुद को सोशल न कर पाना, और डिप्रेशन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं।
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