21 फरवरी 2025 को सिनेमाघरों में दिल जीतने के बाद तेलुगू फिल्म “बापू” अब फाइनली ओटीटी प्लेटफॉर्म जियोहॉटस्टार पर रिलीज हो चुकी है। खास बात यह है कि इसे सिर्फ एक भाषा तक सीमित नहीं रखा गया है बल्कि इसे तेलुगू,तमिल,मलयालम,कन्नड़ के साथ-साथ हिंदी में भी देखा जा सकता है।
फिल्म की टोटल लेंथ 1 घंटा 52 मिनट की है और इसका जॉनर फादर और सन ड्रामा है जो सच्ची घटनाओं से प्रेरित है। फिल्म में मौजूद मुख्य किरदारों की बात करें तो इसमें “ब्रह्मा जी” जैसे दमदार कलाकार नजर आते हैं,जिन्होंने अपने करियर में ढेर सारी फिल्मों में काम किया है जिसमें इसी साल रिलीज हुई “पुष्पा: द रूल पार्ट 2” भी शामिल है।
फिल्म की कहानी किसानों के कर्ज जैसे गंभीर मुद्दे पर आधारित है, जिसे डायरेक्टर “दया” ने बखूबी पेश किया है। खास बात यह है कि स्टोरी को दो अलग-अलग टाइमलाइन में दिखाया गया है जिसमें एक गरीब किसान की जिंदगी और दूसरी ओर एक जेसीबी ड्राइवर की कहानी है जो एक सोने की मूर्ति से बदल जाती है। आइए जानते हैं कि यह दोनों कहानियां कैसे आपस में जुड़ती हैं और करते हैं इस फिल्म का पूरा रिव्यू।
कास्ट:
ब्रह्मा जी, सुधाकर रेड्डी, आमानी, मणि एगुर्ला, श्रीनिवास अवसरला, केथिरी सुधाकर रेड्डी।
कहानी:
फिल्म की शुरुआत होती है एक रहस्यमयी सीन से जहां एक जेसीबी मशीन कुएं की खुदाई कर रही होती है। इसी दौरान ड्राइवर को कुएं में सोने की एक मूर्ति दिखती है। वो चालाकी से अपने मालिक से इसे छुपा लेता है और काम खत्म होने के बाद चुपके से वापस आकर मूर्ति चुरा ले जाता है।
ड्राइवर के घर में उसकी मां और मामा के सिवा कोई नहीं होता। और वो मूर्ति को अपने बक्से में संभालकर रखने के लिए मां को दे देता है। गांव वालों को इसकी भनक तक नहीं लगती। दूसरी ओर फिल्म की मुख्य कहानी एक गरीब किसान “मलैया” के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी पत्नी, बेटे, बेटी और बूढ़े पिता के साथ रहता है।

मलैया का बेटा ऑटो ड्राइवर है जबकि उसकी बेटी “सलूजा” कॉलेज की पढ़ाई खत्म करने वाली है और शहर में सरकारी नौकरी के लिए कोचिंग करना चाहती है। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब मलैया की फसल बर्बाद हो जाती है और उसे गांव वालों का कर्ज चुकाने के लिए सिर्फ 30 दिन का वक्त मिलता है।
पंचायत का फैसला है कि अगर वो कर्ज नहीं चुका पाया, तो उसके खेत बिक जाएंगे। सबूत के तौर पर गांव वाले मलैया से एक सादे कागज पर साइन भी ले लेते हैं। कर्ज के बोझ से परेसान मलैया खुद को फांसी लगाने की कोशिश करता है लेकिन गांव वाले उसे बचा लेते हैं।
इस घटना की खबर उसके बूढ़े पिता तक पहुंचती है,जो कहते हैं कि अगर कोई रास्ता नहीं बचा तो वो खुद फांसी लगा लेंगे। उनकी मौत के बाद सरकार से मिलने वाले 5 लाख रुपये से कर्ज चुकाया जा सकता है। लेकिन बाद में ये बात किन्हीं कारणों से पूरे गांव में फैल जाती है। अब सवाल ये है कि मलैया का परिवार कर्ज से कैसे उबरता है और उस सोने की मूर्ति का राज उसके पिता से कैसे जुड़ता है? यह सब जानने के लिए आपको देखनी होगी फिल्म “बापू”।
टेक्निकल एस्पेक्ट:
फिल्म में गांव का माहौल और किसानों की जिंदगी को जिस तरह दिखाया गया है वह हकीकत के बेहद करीब लगता है। सिनेमैटोग्राफी “वासु पेंडेम” ने की है, जो एकदम जबरदस्त है। कैमरा एंगल्स को खास तौर पर इमोशनल सीन्स में फेस एक्सप्रेशंस को कैप्चर करने के लिए इस्तेमाल किया गया है,जो फिल्म को और गहराई देता है। बैकग्राउंड म्यूजिक भी कहानी के साथ अच्छे से तालमेल बना लेता है।
फिल्म की कमियां:
फिल्म में कुछ छोटी छोटी बातें खटकती हैं। मलैया के परिवार को बेहद गरीब दिखाया गया है जिसके पास कर्ज चुकाने तक के पैसे नहीं,लेकिन उनके पास बाइक और बेटे का ऑटो रिक्शा है। ये थोड़ा अटपटा लगता है और डायरेक्टर को इस डिटेलिंग पर ध्यान देना चाहिए था। इसके अलावा फिल्म में दो गाने भी डाले गए हैं जो हिंदी ऑडियंस के लिए खास जरूरी नहीं लगते। इनकी मौजूदगी कहानी को थोड़ा खींचती हुई महसूस होती है।
पॉजिटिव पहलू:
फिल्म बापू की कहानी किसानों की उस सच्चाई को सामने लाती है जहां कर्ज के बोझ तले दबकर वे आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। इस गंभीर सब्जेक्ट को फिल्म में बखूबी दिखाया गया है जोकि इसे खास बनाता है। दूसरी अच्छी बात है किरदारों का रियल फील होना।
हर किरदार से आप आसानी से जुड़ जाते हैं। खास तौर पर “सुधाकर रेड्डी” जिन्होंने मलैया के बूढ़े पिता का रोल निभाया है। उनकी मासूमियत और एक्टिंग आपका दिल जीत लेती है। खासकर वो सीन “जिसमें उन्हें सांप काटता है और घर वाले उन्हें अस्पताल ले जा रहे होते हैं” इस सीन को देखकर आपका दिल मोमबत्ती की तरह पिघल जाएगा।
निष्कर्ष:
अगर आपको ड्रामा और सच्ची घटनाओं से प्रेरित फिल्में पसंद हैं तो बापू आपके लिए एक शानदार ऑप्शन है। ये फिल्म ना सिर्फ मनोरंजन करती है, बल्कि ये भी सिखाती है कि पैसों की कमी में अपने ही लोग कैसे दूर हो जाते हैं। इसे आप अपनी फैमिली के साथ भी एंजॉय कर सकते है। जियो हॉटस्टार पर हिंदी के साथ साथ कई अन्य भाषाओं में उपलब्ध होने की वजह से यह हर ऑडियंस के लिए है।
फिल्मीड्रिप रेटिंग: 5/3
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