फिल्म की स्टोरी ‘करण’ (जगजीत सिंह) के किरदार पर आधारित है, जो अपने पिता की खातिर ‘अंजलि’ (दिलजोत) से शादी कर लेता है, जिसके लिए वह अपने बचपन के प्यार ‘नताशा’ (मनमीत कौर) को भी कुर्बान कर देता है। लेकिन कहानी में नया ट्विस्ट तब आता है, जब अंजलि को पता चलता है कि करण उसकी बचपन की दोस्त नताशा से प्यार करता है और अपने पिता की खातिर उसने यह शादी की है। इसके बाद अंजलि इस शादी से अपने हाथ पीछे खींच लेती है और अपने पति करण को स्पेस देती है ताकि वह अपनी मर्जी से जिंदगी जी सके।
जिसके बाद कहानी में प्यार के वो मीठे एंगल्स देखने को मिलते हैं, जिन्हें आपने शायद 90 के दशक में देखा होगा। कैसे करण और अंजलि एक साथ रहते हैं और धीरे-धीरे कब एक-दूसरे के करीब आते हैं, उन्हें भी इसका अंदाजा नहीं लगता।
आगे की स्टोरी में इसी तरह से कहानी को बढ़ाया गया है। क्या यह दोनों एक साथ हो पाते हैं या फिर इनके बीच की दूरियां और बढ़ जाती हैं और एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं, यह सब जानने के लिए आपको यह फिल्म देखनी पड़ेगी, जो जियो सिनेमा के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हिंदी में उपलब्ध है।
खामियां
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी पटकथा है, जो बहुत खराब है। इसकी दूसरी सबसे बड़ी कमी एक्टर्स का प्रयास न करना है, फिल्म में किसी भी कलाकार ने अच्छे से अभिनय नहीं किया है। जिसके कारण फिल्म देखने का अनुभव थर्ड क्लास हो जाता है। फिल्म की तीसरी कमी की बात करें तो यह इसका प्रोडक्शन वर्क है, जो काफी घटिया क्वालिटी का है।
टेक्निकल एस्पेक्ट
अगर बात करें इस फिल्म की सिनेमैटोग्राफी की, तो वह काफी खराब है, किसी भी सीन को अच्छे से नहीं फिल्माया गया है, फिर चाहे बात हो इसके कलर ग्रेडिंग की या फिर बैकग्राउंड शैडोज की, यह फिल्म हर क्षेत्र में काफी खराब प्रदर्शन देती है।
फाइनल वर्डिक्ट
अगर आप 90 के दशक की फिल्में देखना पसंद करते हैं और इस दौर को फिर से जीना चाहते हैं, तो आप इस फिल्म को देख सकते हैं। हालांकि, “इस फिल्म से ज्यादा उम्मीदें लगाना मानो भैंस के आगे बीन बजाने के समान है”। क्योंकि इस मूवी की कास्ट हो या फिर टेक्निकलिटी, यह फिल्म आपको हर चीज में पूरी तरह से निराश और हताश करती है।
READ MORE
Thukra Ke Mera Pyaar Season 2 कन्फर्म रिलीज़ डेट
Fisaddi TVF Web Series Review: Tvf पिक्चर्स की सस्ती कॉपी में कितना है दम?











