Last World War Review: सिर्फ 16 करोड़ के बजट में तीसरे विश्व युद्ध का भव्य प्रदर्शन आपको दंग कर सकता है !

Written by: Amir khan
Publish On: September 12, 2025 11:34 PM (IST)
Last World War Review

ये एक एक्शन साइंस फिक्शन थ्रिलर फिल्म है। “हिपहॉप तमीज़्हा आधी” ने फिल्म के निर्देशन के साथ-साथ कहानी भी लिखी है और ये फिल्म के लीड रोल में भी नज़र आ रहे हैं। इनके साथ हमें नसीर, नटराजन सुब्रमण्यम, अनघा जैसे सितारे भी फिल्म में दिखाई देंगे।

“दो घंटे अठारह मिनट” की इस फिल्म का बजट सिर्फ 16 करोड़ का है। फिल्म की कहानी 2028 में तीसरे विश्व युद्ध की है, जिसमें कुछ अंतरराष्ट्रीय ताकतों से भारत देश को बचाते हुए दिखाया गया है।

कहानी

लास्ट वर्ल्ड वार की कहानी को अगर एक लाइन में रिव्यू किया जाए, तो यह एक अच्छी, एक बार देखने लायक फिल्म है। फिल्म की शुरुआत होती है दुनिया के इतिहास से: “दुनिया जब शुरू हुई, तब यहाँ बहुत सारे जीव-जंतु रहा करते थे। बड़े जीव छोटे जीवों पर राज किया करते थे। तब जानवर सिर्फ अपने खाने के लिए एक-दूसरे को मारा करते थे, बिना किसी लालच के, और ये सब एक दिन खत्म हो गए।”

कुछ समय बाद इस धरती पर आदिमानव यानी इंसानों की उत्पत्ति हुई। इन्होंने अपने दिमाग से साइंस को जन्म दिया और हथियार बनाए। इन हथियारों में सबसे ज्यादा खतरनाक हथियार था परमाणु बम। इस परमाणु बम से दुनिया के कुछ शहर लाशों के ढेर के रूप में बदल गए।

तब 193 देशों ने मिलकर 24 अक्टूबर 2028 को यूएन (संयुक्त राष्ट्र) का निर्माण किया। पर बाद में यूएन के दो देशों, रूस और चीन ने 72 अन्य देशों को मिलाकर अपना एक अलग रिपब्लिक नाम का संगठन बना लिया। इनका एक ही लक्ष्य था – पूरी दुनिया पर राज करना।

एक-एक करके भारत के सभी करीबी देश भारत से अलग होकर रिपब्लिक में शामिल होने लगे, जिससे भारत अकेला पड़ने लगा। रूस और अरब देशों ने भारत को तेल देने से मना कर दिया, पर भारत ने घुटने नहीं टेके।

कहानी में दिखाया गया है कि रिपब्लिक ने दुनिया के सभी देशों को अपने कब्जे में ले लिया है और श्रीलंका के साथ मिलकर भारत पर भी हमला कर दिया। भारत के दो बड़े शहरों, दिल्ली और मुंबई पर परमाणु बम से हमला किया गया, जिसके कारण करोड़ों लोगों की मृत्यु हो गई।

फिल्म की कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है, पर इसे इतने अच्छे ढंग से हमारे सामने प्रस्तुत किया गया है कि यह कहीं से भी आभासी नहीं लगती। फिल्म में कुछ कमियाँ भी हैं, जिनकी बात हम आगे करेंगे। बहुत सारे ट्विस्ट और टर्न से भरी इस फिल्म को जानने के लिए आपको इसे सिनेमाघरों में जाकर देखना होगा।

स्क्रीनप्ले

“हिपहॉप तमीज़्हा आधी” फिल्म के प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, राइटर और हीरो भी हैं। इन्होंने फिल्म को जिस तरह से फिल्माया है, उसे देखकर कुछ सीन में आप अपना माथा पकड़ लेंगे कि ये हो क्या रहा है। फिल्म का स्क्रीनप्ले बहुत ढीला है। कहीं से भी कुछ भी चलता रहता है, जो दर्शकों को कई सीन में उलझा सकता है।

एक्शन सीन में बहुत ज्यादा कैमरा हिलता-डुलता नज़र आता है। हीरो के एंट्री सीन में तमीज़्हा आधी एक शेर को सिर्फ इशारों से भगा देते हैं, जो बहुत बचकाना-सा लगता है। कौन-सा सीन कब, कैसे, कहाँ दिखाया जाए, इसमें डायरेक्टर साहब पूरी तरह से चूक गए हैं। पर इसका मतलब ये नहीं है कि फिल्म अच्छी नहीं है। बस आपको फिल्म देखते समय अपना दिमाग थोड़ा कम लगाना है।

म्यूज़िक

फिल्म का म्यूज़िक हिपहॉप तमीज़्हा आधी ने ही दिया है, जो ठीक-ठाक है। शुरुआती रवायत में बैकग्राउंड म्यूज़िक बहुत अच्छा है, जो हमारे कानों को हॉलीवुड बीजीएम की याद दिलाता है। तमिल में इसके सभी गाने अच्छे हैं, हालांकि वो गाने हिंदी में उतने प्रभावी नहीं लगते। ओवरऑल म्यूज़िक ठीक है।

कैरेक्टर परफॉर्मेंस

फिल्म के सभी कैरेक्टर्स की परफॉर्मेंस अच्छी है, जिनमें से नटराजन सुब्रमण्यम ने अपने काम को बहुत अच्छे से किया है। नटराजन सुब्रमण्यम पेशे से एक सिनेमैटोग्राफर हैं, जिन्होंने “जब वी मेट” की सिनेमैटोग्राफी की थी। तमीज़्हा आधी और नसीर ने भी अपने काम को सही ढंग से किया है। अनघा का प्रदर्शन थोड़ा कमज़ोर दिखा है।

क्यों देखें लास्ट वर्ल्ड वार

अगर आप एक मास मसाला फिल्म के चाहने वाले हैं, तो ये समझिए कि ये फिल्म आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आपको इसमें मास मसाला के सभी एंगल देखने को मिल जाएँगे। फिल्म का बजट 16 करोड़ का है, पर इसे देखते समय आपको बिल्कुल भी नहीं लगता कि फिल्म इतने कम बजट में बनाई गई है।

16 करोड़ के बजट में ऐसी फिल्म बनाना बहुत बड़ी बात है। हल्कि बजट कम होने की वजह से सिर्फ वीएफएक्स में फर्क दिखाई देता है, जो थोड़ा कमज़ोर है, पर फिर भी काम चल सकता है। ये एक फुल फैमिली फिल्म है, जिसमें किसी भी तरह के एडल्ट सीन नहीं हैं, जिसे आप अपनी पूरी फैमिली के साथ बैठकर देख सकते हैं।

निष्कर्ष

भारत में सिर्फ पाकिस्तान वॉर पर ही फिल्में बनाई जाती हैं, पर “हिपहॉप तमीज़्हा आधी” ने लीग से हटकर चाइना वॉर पर फिल्म बनाने की सोची। इसके लिए इनकी तारीफ करनी होगी। फिल्म आपको कहीं से भी बोर नहीं करती है। मनोरंजन के लिहाज़ से ये एक बेहतरीन फिल्म है।

तीसरे विश्व युद्ध की फिल्म को इतने कम बजट में दिखाना कोई साधारण बात नहीं है। फिल्म की हिंदी डबिंग अच्छी है। इसके यूनिक और डिफरेंट सब्जेक्ट के लिए आप इसे एक बार देख सकते हैं।

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  • amir khan

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